Wednesday, July 28, 2010

यादें ः नहीं रहे बासवानी


जाने भी दो यारों जैसी आॅलटाइम क्लासिक फिल्म में नसीरूद्दीन के साथ मुख्य भूमिका निभाने वाले रवि बासवानी
का कल रात मुंबई में हार्ट अटैक से निधन हो गया. चैसठ वर्षीय बासवानी मुख्य रूप से थियेटर से जुड़े कलाकार थे. 1981 में संई परांजपे की फिल्म चश्मे बद्दुर के साथ उन्होंने अपने कॅरिअर की शुरूआत की थी. इस फिल्म में फारूख शेख के दोस्त की भूमिका में नजर आए वासवानी ने अपनी बेहतरीन कॉमेडी से दर्शकों को खूब गुदगुदाया था. लेकिन 1984 में आई जाने भी यारों वासवानी के कॅरिअर की सबसे बेहतरीन फिल्म साबित हुई. समाज की व्यवस्था पर कटाक्ष करती इस फिल्म में वासवानी नसीरूद्दीन शाह के साथ फोटोग्राफर की भूमिका निभाई थी. तीन दशक बाद भी इस फिल्म को एक कल्ट फिल्म के तौर पर याद किया जाता है और इसकी कॉमेडी आज भी दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती है.
हाल के सालों में वासवानी कभी हां, कभी ना, प्यार तूने क्या किया, बंटी और बबली जैसी फिल्मों में नजर आए थे. फिल्म इंडस्ट्री में अनुपम खेर और नसीरूद्दीन शाह उनके सबसे करीबी दोस्त थे.

1 comment:

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