Friday, September 3, 2010

सुष्मिता के फंडे

महेश भट्ट की फिल्म से जब सुष्मिता सेन ने अपने फिल्मी कॅरिअर की शुरूआत की थी,, तो उन्हें उसी दौरान बॉलीवुड में पदार्पण करने वाली एक और मिस वल्र्ड ऐश्वर्या राय की टक्कर की अभिनेत्री माना गया था. लेकिन ऐश्वर्या ने जहां काम के प्रति अपने समर्पण के चलते बॉलीवुड की ऊंचाईयों को छुआ, वहीं सुष्मिता अपनी जिंदादिली और काम के प्रति लापरवाह नजरिए के चलते बेहद पीछे रह गई. लेकिन अच्छी बात यह है कि उन्होंने कभी इसका अफसोस नहीं जताया, बल्कि वे हमेशा अपने काम को एंजाय करने वाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती रही है.
सुष्मिता का यह अंदाज चैतीस साल की उम्र में भी कायम है. इसी का नतीजा है कि उनके साथ वाली रवीना टंडन, करिश्मा कपूर, तब्बू जैसी नायिकाएं जहां घर बसाकर कबकी बॉलीवुड को अलविदा कह चुकी हैं, वहीं सुष का जलवा बॉलीवुड में अब भी बरकरार है. उनके साथ वाली हीरोईने माएं बन चुकी है, लेकिन सुष अभी भी अपने प्रेम प्रसंगों को लेकर सुर्खियों में रहती है. कभी उनका प्रेम प्रसंग रणदीप हुड्डा से चलता है, तो कभी मानव मेनन से. कुछ समय पहले उनका संंबंध दूल्हा मिल गया फिल्म के निर्देशक मुसद्दर अजीज से था. फिर उनकों छोड़कर सुष पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज वसीम अकरम के साथ चली गई.
अब सुष ने अकरम को भी छोड़ दिया है. ऐसे में जब हाल ही में मीडियाकर्मियों ने सुष से सवाल पूछा कि आखिर वे शादी कब करेंगी, तो वे मुस्करा दी. उनका जवाब था-जब मुझे सही जीवनसाथी मिल जाएगा.
वेल, सोच तो अच्छी है उनकी. लेकिन हमारी सलाह यह है कि अब यह सही जीवनसाथी उन्हें लल्द ही ढूंढ लेना चाहिए. कहीं ऐसा न हो इस चक्कर में उनकी जवानी ही ढल जाए.

Thursday, September 2, 2010

सदाबहार गुलजार


बांद्रा के प्रतिष्ठित पॉली हिल इलाके के नरगिस दत्त रोड़ पर स्थित बोस्कियाना नामक आशियाना सामने की सड़क से गुजरने वाले उन राहगीरों, जो मुंबईयां पिफल्म इंडस्ट्री में थोड़ी भी दिलचस्पी रखते हैं, का ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींच लेता है. इसकी वजह यह है कि बोस्कियाना नामक इस आशियानें में जो शख्सियत रहती है, वह सिपर्फ बॉलीवुड में ही नहीं देश के साहित्यिक कोनों में भी सबसे सम्मानित शख्सियतों में शुमार होती है. बात हो रही है संपूरण सिंह कालरा की, जिन्हें उनके प्रशंसक और कद्रदान गुलजार साहब के नाम से जानते हैं. इन्हीं गुलजार साहब ने हाल ही में 18 अगस्त को अपना 76वां जन्मदिन मनाया. उम्र आखिरी मोड़ पर जा पहुंची है गुलजार साहब की, लेकिन उनकी जिंदादिली, अपने काम के प्रति जुनून और कुछ नया कर गुजरने की चाहत अभी भी उनमें जस की तस बनी हुई है. ये वहीं खूबियां है, जिनके बूते ही गुलजार बॉलीवुड में उस मुकाम तक पहुंचे है, जहां उनका नाम मुंबईयां पिफल्म उद्योग की सबसे सम्मानित और महान शख्सियतों में लिया जाता है.
ब्रिटिश राज के अध्नि भारत के पंजाब के झेलुन जिलें में 18 अगस्त 1936 को जन्में संपूरणसिंह कालरा अर्थात गुलजार का नाम भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों की सूची में यूं ही शामिल नहीं किया जाता है. इसके लिए उन्होंने अपनी जिंदगी के पूरे पचास बरस बॉलीवुड की अलग-अलग विधओं को समर्पित किए हैं. खास बात यह है कि गुलजार साहब की प्रतिभा बॉलीवुड की किसी एक विध तक ही साीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने प्रत्येक क्षेत्रा में कामयाबी की इबारतें लिखी. 1963 में बिमल राय की पिफल्म बंदिनी के साथ गुलजार साहब के पिफल्मी कॅरिअर का बतौर गीतकार आगाज हुआ. और अपने पहले ही काम में उन्होंने उस बुलंदी को छू लिया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है. इस पिफल्म में उनके द्वारा लिखा गया गीत मोरा गोरा रंग लई ले आज भी भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ गीतों में शुमार किया जाता है. इसी पिफल्म से महान गीतकार एसडी बर्मन के साथ गुलजार साहब का जो रिश्ता बना, तो ताउम्र कायम रहा. इस रिश्ते को सीनियर बर्मन के बेटे आरडी बर्मन ने भी खूब निभाया. बाद के सालों में गुलजार साहब ने जितनी भी पिफल्में निर्देशित की, उन सभी में संगीत आरडी बर्मन ने ही दिया. बतौर निर्देशक अपने कॅरिअर का आगाज गुलजार साहब ने 1971 में आई पिफल्म मेरे अपने से किया. बतौर निर्देशक भी उन्होंने पहली ही पिफल्म में अमिट छोड़ी और यह पिफल्म आज भी भारतीय सिनेमा की क्लासिक पिफल्मों में शुमार होती है. इसके बाद तो सत्तर के दशक में गुलजार का जादू सिर चढ़कर बोला. इस दशक मेंें गुलजार साहब ने परिचय-1972, कोशिश-1972, अचानक-1973, आंधी-1985, मौसम-1975, खूशबू-1975 और किताब-1977 जैसी श्रेष्ठ पिफल्में दी.
गुलजार साहब की महानता सिपर्फ निर्देशक के दायरें तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे बॉलीवुड के सर्वश्रेष्ठ हरपफनमौला गिने जाते हैं. बतौर लेखक, बतौर गीतकार भी गुलजार साहब की उपलब्धियां उन्हें महानतम पिफल्मी शख्सियतों की सूची में सबसे ऊपर रखती है. बतौर गीतकार भी एआर रहमान और विशाल भारद्वाज जैसी हस्तियों के साथ मिलकर उन्होंने छैया छैया, बीड़ी जलाइले जैसे अद्भूत गाने दिए हैं. साठ के दशक में बिमल राय जैसे महान निर्देशक के साथ उन्होंने जितनी सहजता से जुगलबंदी बना ली थी, वही तारतम्य वे भारद्वाज और ए आर रहमान जैसी आध्ुनिक बॉलीवुड की दिग्गज शख्सियतों के साथ भी स्थापित करने में कामयाब रहे हैं. बतौर टेलीविजन लेखक भी गुलजार साहब के नाम पर मोगली का चड्डी पहनके पफूल खिला है जैसी महान रचनाएं शामिल है. असल में गालिब के पक्के भक्त माने जाने वाले गुलजार ने अपनी कलम से बच्चों के लिए भी खूब लिखा है. अपनी बेटी बोस्की से उन्हें बेहद प्यार है, जिनके लिए गुलजार साहब ने उनके बचपन में कविताओं की एक पूरी श्रंखला लिखी थी.
और पिफर गुलजार साहब की महानता इसलिए भी है कि उन्होंने बदलते वक्त के साथ खूद को बखूबी ढाल लिया. न जाने कितनी पिफल्मी हस्तियां बदलते वक्त के साथ सामंजस्य न बना पाने की वजह से भूला दी गई, लेकिन गुलजार साहब आज भी बॉलीवुड की श्रेष्ठ शख्सियतों में गिने जाते हैं, तो सिपर्फ इसीलिए कि उन्होंने बदलते वक्त के साथ बखूबी तालमेल बिठा लिया. यह गुलजार साहब की महानता का प्रमाण ही है कि मोरा गोरा रंग लई ले जैसा महान क्लासिक गीत लिखने के साथ ही वे छैया छैया और बीड़ी जलाइले, कजरारे-कजरारे जैसे चलताउ गाने भी बड़ी श्रेष्ठता के साथ लिख देते हैं.
यही वजह है कि भारतीय सिनेमा को करीब से जानने वाली एक पूरी पीढ़ी गुलजार साहब की प्रतिभा की कायल है. इनमें हम और आप जैसे साधरण सिनेमाप्रेमी ही नहीं बॉलीवुड की कई शख्सियतें भी शामिल है, जो गुलजार को अपना गुरू मानती हैं. इनमें विशाल भारद्वाज, एआर रहमान, सुखविंदरसिंह, संजय गुप्ता, मणिरत्नम, शाद अली, प्रसून जोशी जैसी अलग-अलग विधओं से जुड़ी शख्सियते भी शुमार है, जो अपने काम में कामयाबी के लिए आज भी गुलजार साहब से प्रेरणा लेती है. विशाल भारद्वाज तो पिछले एक दशक से गुलजार साहब के सबसे करीबी चेले बने हुए हैं. ओंकारा, मकबूल, कमीने जैसी क्लासिक पिफल्मों के निर्देशक के तौर पर भले ही विशाल भारद्वाज वर्तमान में बॉलीवुड के सबसे प्रतिभावान निर्देशकों में शुमार होते हैं, लेकिन स्वयं भारद्वाज के लिए उनके गुलजार साहब ही सबकुछ है. आमतौर पर मीडिया से ज्यादा न बतियाने वाले विशाल भारद्वाज कई बार सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि उनकों निर्देशन में लाने का सबसे ज्यादा श्रेय गुलजार साहब को हीे जाता है. असल में भारद्वाज ने बतौर संगीतकार अपने कॅरिअर की शुरूआत गुलजार साहब की पिफल्म माचिस से की थी. इस पहली ही पिफल्म में गुलजार-भारद्वाज की जुगलबंदी में दर्शकों को चप्पा-चप्पा चरखा चले जैसे श्रेष्ठ गीत की सौगात मिली थी. इसके बाद हूतूतू में भी इस जुगलबंदी की करामात दिखाई दी. भारद्वाज के मुताबिक इन पिफल्मों के बाद गुलजार साहब ने लगभग आध दर्जन पिफल्म पफेस्टिवल के जरिए भारतीय और विश्व सिनेमा की महानतम पिफल्मों से परिचय कराया. इसके बाद ही भारद्वाज ने बतौर निर्देशक खुद को आजमाने का पफैसला किया. भारद्वाज की तरह ही एआर रहमान और सुखविंदरसिंह भी गुलजार साहब के सबसे करीबी लोगों में शुमार होते हैं. रहमान-गुलजार-सुखविंदर की तिकड़ी ने बॉलीवुड को छैया-छैया, जय हो जैसे श्रेष्ठ गाने दिए हैं. एआर रहमान ने भी खुले तौर पर स्वीकार किया है कि बॉलीवुड में उन्होंने जो भी सर्वश्रेष्ठ किया है, उसकी प्रेरणा गुलजार ही रहे हैं. वहीं, संजय गुप्ता जैसा मसाला पिफल्मों का निर्देशक भी गुलजार साहब के सानिध्य में आकर कलात्मक सिनेमा की ओर मुड़ गया. कांटे, मुसापिफर जैसी घनघोर मसाला पिफल्में बनाने वाले संजय गुप्ता की एक पिफल्म दस कहानियां में जब गुलजार एक गीतकार के तौर पर जुड़े तो, वहीं से गुप्ता की पिफल्मों का टेस्ट बदल गया. इसके बाद संजय गुप्ता ने अपने बैनर तले द ग्रेट इंडियन बटरफ्रलाय और पंख जैसी क्लासिक पिफल्में बनाई है. इसी तरह बेहतरीन गीतकारों में गिने जाने वाले प्रसून जोशी भी गुलजार साहब के कायल हैं. प्रसून जोशी के मुताबिक-‘सत्तर साल से ज्यादा की उम्र में भी गुलजार साहब किसी युवा की तरह नजर आते हैं. मुझे हैरानी होती है कि इस उम्र में भी वे कैसे आज के दर्शकों की पसंद के गीत रच लेते हैं.’ प्रसून जोशी का भी मानना है कि विज्ञापन जगत से गीत लेखन में वे गुलजार की प्रेरणा से ही आए थे.
पिफर, गुलजार की गूंज देश से बाहर भी सुनाई देती है. भारतीय सिनेमा के इतिहास के वे इकलौते गीतकार है, जिन्होंने प्रतिष्ठित आस्कर पुरस्कार जीतने का कारनामा कर दिखाया है. पिछले साल जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराही गई पिफल्म स्लमडॉग मिलिनेयर का पूरी दुनिया में डंका मचा था, तो इसके साथ ही इस पिफल्म में जय हो जैसा श्रेष्ठ गीत लिखने वाले गुलजार साहब का नाम भी सुनहरे अक्षरों में अंकित हो गया. अपनी विनम्रता के चलते गुलजार भले ही इस गीत का पूरा श्रेय अपने साथियों-ए आर रहमान और सुखविंदरसिंह को दे, लेकिन उनके चाहने वाले भलीभांति जानते हैं कि जय हो गीत में सबसे ज्यादा महक गुलजार साहब के शब्दों की ही आती है.
तो, अब यही गुलजार साहब आज 74 बरस के हो गए हैं. लेकिन उनका सफर अभी भी जारी है. एआर रहमान, मणिरत्नम, विशाल भारद्वाज जैसे नई पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ लोगों के साथ उनकी जुगलबंदी आज भी उनके प्रशंसकों का दिल जीत लेती है. इस मौके पर गुलजार साहब के करोड़ों प्रशंसकों के साथ हम भी यही दुआ करेंगे कि आने वाले कई सालों तक उनकी कलम की धार इसी तरह हमारे दिलों को लुभाती रहे.

पुष्पेन्द्र आल्बे

Wednesday, September 1, 2010

सुष्मिता के फंडे



महेश भट्ट की फिल्म से जब सुष्मिता सेन ने अपने फिल्मी कॅरिअर की शुरूआत की थी,, तो उन्हें उसी दौरान बॉलीवुड में पदार्पण करने वाली एक और मिस वल्र्ड ऐश्वर्या राय की टक्कर की अभिनेत्री माना गया था. लेकिन ऐश्वर्या ने जहां काम के प्रति अपने समर्पण के चलते बॉलीवुड की ऊंचाईयों को छुआ, वहीं सुष्मिता अपनी जिंदादिली और काम के प्रति लापरवाह नजरिए के चलते बेहद पीछे रह गई. लेकिन अच्छी बात यह है कि उन्होंने कभी इसका अफसोस नहीं जताया, बल्कि वे हमेशा अपने काम को एंजाय करने वाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती रही है.
सुष्मिता का यह अंदाज चैतीस साल की उम्र में भी कायम है. इसी का नतीजा है कि उनके साथ वाली रवीना टंडन, करिश्मा कपूर, तब्बू जैसी नायिकाएं जहां घर बसाकर कबकी बॉलीवुड को अलविदा कह चुकी हैं, वहीं सुष का जलवा बॉलीवुड में अब भी बरकरार है. उनके साथ वाली हीरोईने माएं बन चुकी है, लेकिन सुष अभी भी अपने प्रेम प्रसंगों को लेकर सुर्खियों में रहती है. कभी उनका प्रेम प्रसंग रणदीप हुड्डा से चलता है, तो कभी मानव मेनन से. कुछ समय पहले उनका संंबंध दूल्हा मिल गया फिल्म के निर्देशक मुसद्दर अजीज से था. फिर उनकों छोड़कर सुष पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज वसीम अकरम के साथ चली गई.
अब सुष ने अकरम को भी छोड़ दिया है. ऐसे में जब हाल ही में मीडियाकर्मियों ने सुष से सवाल पूछा कि आखिर वे शादी कब करेंगी, तो वे मुस्करा दी. उनका जवाब था-जब मुझे सही जीवनसाथी मिल जाएगा.
वेल, सोच तो अच्छी है उनकी. लेकिन हमारी सलाह यह है कि अब यह सही जीवनसाथी उन्हें लल्द ही ढूंढ लेना चाहिए. कहीं ऐसा न हो इस चक्कर में उनकी जवानी ही ढल जाए.

अमिताभ की प्राइवेसी


अमिताभ बच्चन को भले ही देशभर के सिनेमा प्रेमी अपने दिल का सरताज बनाकर रखते हो, लेकिन अमिताभ इसकी परवाह न करते हुए गाहे-बगाहे कुछ ऐसी हरकतें कर देते हैं, जिससे उनके ऊंचे कद और महिमामंडन पर सवालिया निशान खड़े हो जाते हैं. याद कीजिए कुछ साल पहले की बात जब अमिताभ अमरसिंह के सहारे समाजवादी हुआ करते थे. उस दौर में अमिताभ ने गांधी-नेहरू परिवार के बारे में एक विवादास्पद टिप्पणी करते हुए गांधी परिवार को राजा और खुद के परिवार को रंक बताया था. और अब अमिताभ ने एक बार फिर अपने एक कृत्य से विवाद खड़ा कर दिया है. असल में इन दिनों मंुबई शहर में मेट्रो रेल परियोजना का काम पूरे जोर-शोर से चल रहा है. अगर आप मुंबई जाएं, तो किधर का भी रास्ता चुने, मेट्रो का काम हर तरफ चलता दिखाई देगा. अनिल अंबानी की कंपनी इस मेट्रों परियोजना को मुंबई में साकार करने के लिए दिन-रात जुटी हुई है. यह परियोजना पूरे मुंबई के लिए जरूरी है, क्यांेकि इससे ट्रॉफिक से बदहाल हो चुके महानगर की आवागमन की समस्या पूरी तरह से हल हो जाएगी. इससे उन लाखों लोगों को रोज-रोज ट्राफिक की दिक्कतों से जूझना नहीं पड़ेगा.
लेकिन महानायक का दर्जा रखने वाले अमिताभ को आम मुंबईकर की दिक्कतों से कोई लेना-देना नहीं है. असल में मेट्रो का एक हिस्सा अमिताभ के घर प्रतीक्षा के सामने से भी गुजरेगा. बस इसी को लेकर अमिताभ ने रोना रो दिया कि इससे उनकी प्राइवेसी भंग हो जाएगी. अमिताभ का यह कहना था कि राजनीतिक पार्टियों सहित मुंबईकर भी उनके खिलाफ हो गए. सवाल पूछे जाने लगे कि अमिताभ को अपनी प्राइवेसी की ज्यादा चिंता है या फिर मुंबई के विकास की.
याद कीजिए 2001 में भी एक ऐसा ही विवाद खड़ा हुआ था, जब स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने अपने घर के सामने प्लाईओवर बनने का पुरजोर विरोध किया था. लता दी तो यह मामला संसद तक ले गई थी. इसका नतीजा यह निकला कि लता दी के घर के सामने का पेडर रोड़ आज तक विकास के लिए तरस रहा है.
अब अमिताभ भी यही चाहते हैं कि मुंबई का विकास भले हीे नह हो, लेकिन उनकी प्राइवेसी में खलल नहीं पड़नी चाहिए. अफसोस कि ऐसा सोचते वक्त ये सितारे यह भूल जाते हैं कि यह मुंबई ही है, जिन्होंने इनकों सर माथे पर बिठाया है.

Tuesday, August 31, 2010

मोदी को किंग खान की ना



बॉलीवुड में कोई किसी का सगा नहीं होता. समय-समय पर यह बात साबित होती ही रहती है. ऐसा ही कुछ कड़वा अनुभव हाल ही में आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी को हुआ. जब भारत के क्रिकेट गलियारों में मोदी का सिक्का चलता था, तो विजय माल्या जैसे उद्योगपति के साथ ही शिल्पा शेट्टी,, प्रिटी जिंटा और शाहरूख खान जैसे बॉलीवुड के सितारे भी उनके आगे-पीछे मंडराते थे. आईपीएल के पहले तीन सत्रों में पूरी दुनिया के क्रिकेटप्रेमियों ने देखा कि किस तरह ये बॉलीवुड सितारे मोदी की चापलुसी में लगे रहते थे. खबरे तो यह तक है कि मोदी की दखलअंदाजी के चलते ही शाहरूख, शिल्पा और प्रिटी जिंटा आईपीएल की टीमें खरीद पाएं.
लेकिन यह सब पुरानी बाते हैं. वर्तमान में हकीकत यह है कि भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते मोदी आईपीएल से निष्कासित किए जा चुके है.ं अब आईपीएल की चमक-धमक तो रही नहीं मोदी के आस-पास, सो इन मतलबी बॉलीवुड सितारों ने भी उनसे मुंह फेर लिया है. इसका अनुभव हाल ही में मोदी को तबे हुआ, जब उन पर परसेप्ट पिक्चर कंपनी ने एक पिक्चर बनाने की सोची. इस पिक्चर में मुख्य भूमिका के लिए शाहरूख का नाम लिया गया. मोदीे ने खुद किंग खान से गुजारिश की, कि वे पिक्चर में उनका रोल कर लें. लेकिन शाहरूख ने मोदी को सिरे से मना कर दिया.
जाहिर है, शाहरूख अब डूब चुके मोदी के साथ कोई ताल्लुक नहीं रखना चाहते हैं. आईपीएल में उनकी कोलकता की टीम वैसे ही सबसे फिसड्डी है. ऐसे में वे मोदी से करीबी दिखाकर बीसीसीआई को नाराज नहीं करना चाहते. इसीलिए किंग खान ने फायदे के लिए दोस्ती को अंगूठा दिखाते हुए मोदी को सिरे से मना कर दिया.

जॉन-बिपाशा का टिकाउ रिश्ता



ऐसे में जबकि बॉलीवुड में प्रेम संबंध हर शुक्रवार को बदल जाया करते हैं और करीना, शाहिद, प्रियंका, अक्षय, कैटरीना, सलमान, दीपिका, रणबीर जैसे कलाकार थोड़े समय के टाइमपास के बाद ही अपने प्रेमी-प्रेमिकाओं को भी बदल डालते हैं, बॉलीवुड में जॉन अब्राहम और बिपाशा बासु के बीच का प्यार कई बरसों के बाद भी ज्यों का त्यों बना हुआ है. इसीलिए उन्हें अगर बॉलीवुड का सबसे समर्पित प्रेमी जोड़ा कहा जाएं, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. जॉन अब्राहम से पहले बिपाशा की जिंदगी में डीनो मारिया आए थे. हालांकि उस वक्त बिपाशा ने भी प्रेमी बदलने के बॉलीवुड टेªंड पर चलते हुए ही डीनों को अलविदा कह दिया था, लेकिन जब से जॉन उनकी जिंदगी में आए है यह बंगाली बाला गजब की वफादारी दिखा रही है. इस दौरान दोनों के संबधों के बीच कई तरह के मोड़, तूफान आए, कई बार उनके अलगाव की खबरें भी आइ्र्र, लेकिन उन्होंने अपने रिश्ते में वफादारी हमेशा बनाए रखी है. शायद इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि बिपाशा और जॉन दोनों ही अपने संबंध को लेकर पूरी तरह से ईमानदारी बरतते हैं. जॉन के साथ काम करने वाली हीरोईनों से बिपाशा को कोई दिक्कत नहीं होती, और यही नजरिया बिपाशा के बारे में जॉन भी रखते हैं. इसी का नतीजा है कि कई बरस गुजर जाने के बाद भी वे दोनों अपने रिश्ते कोे बनाए रखने में कामयाब है.
इसलिए कहा जा सकता है कि हर शुक्रवार को बदलते रिश्तों के बीच जॉन-बिपाशा का रिश्ता फेविकोल की तरह टिकाउ है. ऐसे में अगर बिपाशा कहती है कि जॉन के साथ रहते हुए उन्हें विवाह करने की कोई जरूरत ही महसूस नहीं होती, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. आखिर किसी भी रिश्ते के कामयाब होने के लिए सबसे जरूरी एकदूसरे पर भरोसा होता है. यह खूबी उन दोनों के रिश्ते में है. तो फिर उन्हें विवाह जैसे बंधन की जरूरत भी नही.

Monday, August 30, 2010

रोते-गाते सितारे


एक दौर था, जब फिल्म इंडस्ट्री के नायक-नायिका ज्यादा से ज्यादा इस बात की कोशिश में लगे रहते थे कि दर्शकों के सामने वे ज्यादा दिखाई न दे. इस ओवरएक्सपोजर से वे खासे डरते थे. कहीं कार्यक्रम में जाना है, बाजार में बीवी-बच्चों के साथ घूमने जाना है तो विग पहनकर जाओ, मूंछे लगाकर जाओ. याने कि ऐसे हो जाओं कि कोई भूलकर भी पहचान न पाएं.
लेकिन अब दौर बदल गया है. आजकल के नायक-नायिका फिल्मों में तो कम नजर आते हैं, लेकिन विज्ञापनो, पत्रकार वार्ताओं और न जाने कौन-कौन से तरीकों से प्रचार में बने रहते हैं. अब ज्यादा से ज्यादा वक्त तक दर्शकों के दिलो-दिमाग में बने रहना ही हर हीरो-हीरोईन की पहली प्राथमिकता होती है.
इसीलिए आजकल ये लोग छोटे पर्र्दे पर आने से भी परहेज नहीं करते. हाल ही में टीवी सेट के सामने नजर गढ़ाई तो तीन हीरो-हीरोईने खुलेआम रोते दिखाई दिए. जी हां, वे कैमरे के सामने ही रो रहे थे. सबसे पहले देखा दीपिका पादुकोण को. अपनी फिल्म लफंगे परींदे के प्रमोशन के लिए वे एक रियलिटी शो में गई थी. वहीं एक गायक ने एक ऐसा गाना गा दिया, जो दीपिका के दिेल के बहुत करीब था. बस वे रियलिटी शो के दौरान ही रो पड़ी. खबरिया चैनलों ने तत्काल नमक-मिर्च लगाकर दर्शकों को परोस दिया कि दीपिका को तो रणबीर कपूर की याद आ गई थी, बस इसीलिए रो पड़ी बेचारी.
इसके बाद देखा सोनाली सिन्हा को. शत्रुध्न सिन्हा की यह बीटिया दबंग फिल्म से सलमान खान के साथ अपनी फिल्मी पारी शुरू कर रही है. फिल्म रिलीज होने वाली है, सो वे भी एक रियलिटी शों में अपनी मां के साथ जा पहुंची. तो, दीपिका की तरह ही सोनाक्षी भी इस शो में रो पड़ी. वजह बाद में उन्होंने खुद ही बता दी कि इस शो में मां के उपर एक गाना सुनकर उनकी आंखों में आंसू आ गए. खबरिया चैनलों ने इस खबर को इस तरह दिखाया कि मां की बात तो फिजूल है, शायद सोनाक्षी को अपने किसी ब्वॉयफ्रेंड की याद आ गई होगी.
इसके बाद टीवी पर्दे पर दिखे सलमान खान. दबंग सलमान खान की पुरानी तस्वीरे एक खबरियां चैनल दिखा रहा था, जिसमें वे आंसू बहाते नजर आ रहे थे. टीवी वालों ने झटपट नमक-मिर्च लगा दी कि साहब कैटरीना तो सलमान की जिंदगी से तभी बाहर जा चुकी थी, जब इन तस्वीरों में वे रोते दिखाई दिए थे.
यानी कि आजकल रोकर लोकप्रियता बटोरना फिल्मी सितारों का नया शगल बन गया है. टीवी चालू कीजिए आपको भी कोई न कोई हीरो-हीरोईन तो रोते दिख ही जाएंगे.

राखी सावंत का इंसाफ



राखी सावंत का नाम ही काफी है, विवादों को जन्म देने के लिए. बॉलीवुड से जुड़ी वे एकमात्र ऐसी शख्सियत हैं, जो बिना किसी फिल्म में काम किए ही इंडस्ट्री की कई बड़ी हीरोईनों से ज्यादा सुर्खियों में रहती है. असल में उनकी दाल-रोटी सुर्खियों में बने रहने से ही चलती है. सो, राखी ने एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला हुआ है. वे छोटे पर्दे के लगभग सभी रियलिटी शों में पहुंच जाती है, बेहुदा परफारमेंस देती है और इसी के जरिए लोकप्रियता कबाड़ लिया करती है.
अब वहीं राखी सावंत छोटे पर्दे पर एक रियलिटी शो लेकर आने वाली है, जिसमें वे जज की भूमिका में दिखाई देंगी. जी हां, जज की भूमिका में ! अब इसे भारतीय छोटे पर्दे का पतन कहे या कुछ और लेकिन सच यही है कि अब राखी सावंत जज की कुर्सी पर बिठाई देंगी. एनडीटीवी इमेजिन पर प्रसारित होने जा रहे ‘राखी का इंसाफ’ नामक इस रियलिटी शो में राखी उन लोगों के मामले सुलझाते दिखाई देगी, जो कोर्ट-कचहरी जाने का खर्चा नहीं उठा पाते. ऐसे ही लोगों की समस्याओं को राखी सावंत सुलझाएगी.
कुछ समय पहले छोटे पर्दे पर किरण बेदी जैसी विख्यात महिला अधिकारी भी जज की भूमिका में दिखाई दी थी. वे इसकी हकदार भी है, लेकिन आजकल राखी सावंत जैसी विषकन्याओं का जमाना है. सो, अब राखी को छोटे पर्दे पर जज के तौर पर झेलने के लिए तैयार हो जाइए.

Saturday, August 28, 2010

कैटरीना का नया दोस्त


यह तो सलमान खान की फिल्म दबंग की रिलीज के बाद ही पता चल सकेगा कि कैटरीना कैफ के साथ उनका सच में बे्रकअप हो गया है या फिर यह फिल्म को हिट कराने का फंडा है, लेकिन कैट जरूर इन दिनों ऐसा साबित कर रही है मानों अब वे सलमान से पूरी तरह दूर जा चुकी है. सो, इन दिनों कैटरीना कैफ एक अन्य बॉलीवुड सख्सियत की तारीफों के पूल बांधने में जुटी हुई है. यह बॉलीवुड शख्सियत हैं अयान मुखर्जी. अयान वहीं निर्देशक हैं, जिन्होंने पिछले साल वेक अप सीड जैसी हिट फिल्म दी थी. इसके बाद से ही अयान को बॉलीवुड के सबसे उभरते निर्देशकों में गिना जा रही है. कैट भी इन्हीं अयान के जादुई आकर्षण में आ गई हैं. इन दिनों आजकल कैट हर जगह अपने इस नए दोस्त की तारीफें ही करती रहती है. कैट के मुताबिक अयान इस समय बॉलीवुड के सबसे प्रतिभावान युवा निर्देशक हैं.
दिलचस्प बात यह है कि अयान दीपिका पादुकोण के भी अच्छे दोस्त माने जाते हैं. दीपिका भी सार्वजनिक तौर पर उन्हें अपना सबसे करीबी दोस्त बताती रहती है. मात्र एक फिल्म के निर्देशन के बाद ही अयान पर तो बॉलीवुड की दो सुंदरियां फिदा हो गई है, लेकिन इस नए रिश्ते को लेकर सल्लू मियां क्या प्रतिक्रिया देते हैं, यह देखना दिलचस्प रहेगा.

सोहा का वीडियो और फरेब



आमतौर पर विवादों से दूर रहने वाली सोहा अली खान इन दिनों एक अनचाहे विवाद में उलझी हुई है. मामला यह है कि सैफ अली खान की बहन और शर्मिला टेगोर की बहन सोहा की नग्न वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रही है. दरअसल कुछ दिनों पहले सोहा अपने सेलून पर रूटीन वेक्सींग के लिए गई थी. लेकिन इसी दौरान शोरूम में उनका नग्न वीडियों बना लिया. चूंकि सोहा को इस बारे में जरा भी भनक नहीं हुई, इसलिए वे पूरे आराम से यह वेक्सीनिंग कराती रही. लेकिन अब इंटरनेट पर इस वीडियो की धूम मची हुई है. इंटरनेट की कुछ वेबसाईटों पर जोर-शोर से प्रचारित किया जा रहा है कि 20 से 25 डॉलर देकर आसानी से इस वीडियों को कही भी देखा जा सकता है. हालांकि इनमें से ज्यादा वेबसाईटें फर्जी ही साबित हो रही है. लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि इस पूरे वाकिये के चलते सोहा की गरीमामयी छवि तो बुरी तरह खराब हुई ही है.
वैसे भी, आजकल बॉलीवुड में इस तरह की घटनाएं कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है. बीते कुछ सालों में कई बॉलीवुड अभिनेत्रियों को इंटरनेट की वजह से इस तरह शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है. हाल ही में इंटरनेट पर कैटरीना कैफ की अश्लील सामग्री ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थी, जो कि बाद में फर्जीवाड़ा साबित हुई. वहीं कुछ महीनें पहले कैट की छोटी बहन के अश्लील विडियों ने तो देश-दुनिया में खूब हंगामा मचाया था. और अब प्रतिष्ठित और गरीमामयी पटौदी परिवार की लाडली बिटिया सोहा भी इनके जाल में फंस गई है.
जाहिर है, इस तरह के चलन पर तत्काल लगाम लगाए जाने की जरूरत है.

Friday, August 27, 2010

लारा की प्रेम कहानी



बॉलीवुड में जल्द ही एक और प्रेम कहानी पर मुहर लगने वाली है. यह प्रेम कहानी है बॉलीवुड की सेक्सी हीरोईन लारा दत्ता और उनके प्रेमी महेश भूपति की. भूपति अपनी पत्नी को सात साल के दांपत्य जीवन के बाद तलाक दे चुके हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह लारा ही रही. पिछले लंबे समय से इस बात के कयास लगाए जाते रहे हैं कि दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गया है और यही भूपति के तलाक की वजह है. पिछले कुछ समय में अलग-अलग समारोहों में भी दोनों साथ नजर आए हैं. हालांकि जैसा कि बॉलीवुड में इन दिनों रिवाज बन गया है, लारा ने अपने प्रेम संबंधों को कभी भी स्वीकार नहीं किया. लेकिन अब जबकि भूपति अपनी पत्नी के साथ तलाक की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं, यह माना जा रहा है कि जल्द ही वे दोनों अपने रिश्ते को सार्वजनिक कर देंगे. अब यूएस ओपन खेला जाने वाला है, जिसके पहले माना जा रहा है कि लारा-भूपति भी अपने रिश्ते का ऐलान कर देंगे. यानी कि बॉलीवुड और खेल की हस्तियों के बीच प्रेम संबंधों की सूची में एक और युगल का नाम जल्द ही जुड़ने वाला है.

बच्चन परिवार के लिए अंगुर खट्टे


बॉलीवुड के सबसे प्रख्यात फिल्मी घराने के तौर पर पहचाने जाने वाले बच्चन परिवार का जादू बीते कुछ समय से लगातार फीका पड़ता जा रहा है. परिवार के मुखिया अमिताभ बच्चन का जादुई करिश्मा तो कब का खत्म हो चुका है, लेकिन अब परिवार के दूसरे सदस्यों बेटे अभिषेक और बहू ऐश्वर्या का जलवा भी खत्म होने लगा है. पहले बात करते हैं अमिताभ की. वे तो पिछले कई सालों से नायक के सहायक की भूमिका ही निभाते रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी यह पारी भी खत्म होती दिखाई दे रही है. पिछले साल अलादीन जैसी उनकी बड़े बजट की फिल्म नाकाम रही. अब उम्र भी ढलती जा रही है, सो बॉलीवुड के निर्देशक भी उनसे परहेज करने लगे हैं. इसकी एक वजह यह भी है कि अब युवा पीढ़ी के भारतीय दर्शक भी अमिताभ की फिल्मों में उस तरह से दिलचस्पी नहीं दिखाते, जैसा कि पहले सत्तर-अस्सी के दशक में दर्शक दिखाया करते थे.
दूसरी ओर, बेटे अभिषेक का कॅरिअर तो कभी परवान चढ़ा ही नहीं. पिता अमिताभ ने दशकों तक बॉलीवुड पर राज किया, लेकिन अभिषेक कभी भी इंडस्ट्री का शीर्ष सितारा नहीं बन पाए. कॅरिअर की शुरूआत की दर्जनों नाकाम फिल्मों से तो उनको जैसे-तैसे मुक्ति मिल गई, लेकिन नंबर एक की रेस में वो कभी भी नहीं आ पाए. सही स्थिति यह है कि साल-दो साल में उनकी कोई एकाध फिल्म हिट हो जाती है, लेकिन उसके बीच में चार-छह नाकाम फिल्में भी उनके हिस्से में दर्ज हो जाती है. पिछले दो साल की ही बात करें तो द्रोणा, रावण, दिल्ली 6 जैसी महंगे बजट की उनकी कई फिल्में टिकट खिड़की पर औंधे मूंह गिरी,, जिसके चलते इन फिल्मों के निर्माताओं को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा. अब हालत यह है कि वे भी तेजी से इमरान खान, रणबीर कपूर जैसे युवा सितारों के प्रभाव के नीचे दबते जा रहे हैं.
अब बात आती है ऐश्वर्या राय की. ऐश्वर्या की किस्मत भी अपने पति अभिषेक की तरह ही रही है. खूबसूरत तो वे बला की है, लेकिन अच्छा अभिनय उन्हें आता नहीं. इसके चलते वे बॉलीवुड में बनी तो हुई है, लेकिन अच्छी और कामयाब फिल्में उनके हिस्से में कम ही आती है. इस साल उनके खाते में भी रावण जैसी नाकाम फिल्म दर्ज है.
एक और बात यह है कि इधर आजकल बॉलीवुड में दर्जनों युवा और खूबसूरत नायिकाएं आ गई है. सोनम कपूर, दीपिका पादुकोण, प्रियंका चैपड़ा, कैटरीना कैफ के हुस्न से मदहोश दर्शकों ने अब उम्र के तीसरे दशक में पहुुंच चुकी ऐश्वर्या से एक तरह से किनारा ही कर लिया है.
इस तरह कहा जा सकता है कि जहां तक बॉलीवुड का सवाल है, तो अब बच्चन परिवार के लिए अंगूर खट्टे होने लगे हैं.

Thursday, August 26, 2010

प्रियंका-शाहिद की खिचड़ी


बॉलीवुड में इन दिनों प्यार के मोर्चे पर हर जगह उथलपुथल मची हुई है. जहां एक ओर सलमान खान और कैटरीना कैफ के रिश्ते टूटने की खबरे सुर्खियां बटोर रही है, वहीं दूसरी ओर खबरे हैं कि शाहिद कपूर इन दिनों प्रियंका चैपड़ा के दीवाने हो गए हैं. इन दोनों ने पहली बार विशाल भारद्वाज की फिल्म कमीने में साथ काम किया था और तभी से दोनों के बीच अच्छी दोस्ती है. लेकिन अब सुनने में आ रहा है कि इस दोस्ती ने नजदीकियों का चोला पहन लिया है. वैसे भी प्रियंका चैपड़ा हरमन बावेजा और शाहिद कपूर करीना से ब्रेकअप के बाद नए प्रेमी की तलाश में थे ही. ऐसे में दोनों पिछले दिनों में एक-दूसरे के बेहद नजदीक आ गए हैं. पिछले दिनों इन दोनों के रिश्ते को लेकर अटकलें तब गहरा गई थी, जब दोनों ने एक ही वक्त पर एक ही फिल्म की तारीफ अपने ट्वीटर खाते पर कर डाली. इससे संदेश यह गया कि आधी रात को दोनों उसी फिल्म को साथ में देख रहे थे, जिसकी बाद में उन्होंने तारीफे की.
और अगर ऐसा सही में है, तो फिर तो प्रियंका-शाहिद को अग्रीम में बधाई दी जानी चाहिए. कमीने के नायक-नायिका रियल लाइफ में भी धमाल मचाने की पूरी कूव्वत रखते हैं.

करण जौहर का फलसफा



जब फिल्म के प्रचार की बात आती है और वह भी खासतौर पर मुप्त के प्रचार के, तो बॉलीवुड के लोग कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. अब करण जौहर की फिल्म वी आर फेमेली से जुड़े विवाद को हीे ले लीजिए. करण जोहर की यह फिल्म हॉलीवुड की हिट पिक्चर स्टेपमॉम की रिमेक है और यह 2 सितंबर को रिलीज हो रही है. लेकिन इससे पहले ही पिक्चर को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है और यह विवाद फिल्म के सितारों काजोल, करीना कपूर से ही जुड़ा हुआ है. दरअसल रिलीज से पहले आजकल टीवी चैनलों पर इस पिक्चर के प्रोमों खूब दिखाए जा रहे हैं. बस यही प्रोमो देखकर फिल्म की नायिका काजोल के पतिदेव अजय देवगन नाराज हो गए हैं. अजय को नाराजगी इस बात की है कि बावजूद इसके कि काजोल फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही है और फिल्म की सबसे वरिष्ठ कलाकार है, उन्हें दूसरी नायिका करीना कपूर की तुलना में कम तवज्जो दी जा रही है. इसी बात को लेकर अजय ने मीडिया के सामने भी अपनी नाराजगी जाहिर कर दी. लोगों को लगा कि यह विवाद गहरा सकता है, क्योंकि मामला अहम से जुड़ा हुआ है. लेकिन खुद करण जौहर ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है. उल्टे करण जौहर का तो कहना है कि विवाद कैसा भी हो, फिल्म के लिए तो हमेशा फायदेमंद ही होता है.
वैसे, करण जौहर की इस तरह की बातों से हैरानी भी नहीं होनी चाहिए. क्योंकि बॉलीवुड की दुनिया में अब वो भी विवादों के जरिए मुप्त की पब्लिसिटी बटोरने के तरीके सीख गए हैं. याद कीजिए करण की फिल्म माई नेम इज खान की रिलीज के वक्त शिवसेना के साथ कितना विवाद हुआ था. इससे फिल्म को फायदा ही हुआ. इसीलिए अब करण जौहर भी विवादों का महत्व समझ गए हैं. अब उनकों मालुम हो गया है कि अगर फिल्म को फायदा पहुंचाना है, तो उसे किसी भी तरह विवादों में लाना होगा.
सही भी है, अगर कामयाबी मिलती है तो फिर विवाद तो अच्छे हैं.

Saturday, August 21, 2010

सीधी-सादी सोनाक्षी



बॉलीवुड में रोजाना आने वाली दर्जनों-सैकड़ों हीरोईने भले ही कामयाबी हासिल करने के लिए अंग प्रदर्शन के मामले में कोई कोताही नहीं बरतती हो, लेकिन जहां तक सोनाक्षी सिन्हा का सवाल है, तो बीते जमाने के सितारे शत्रुध्न सिन्हा की यह बिटिया फिल्मों में जिस्म की नुमाइश के पूरी तरह खिलाफ है. इसकी वजह यह है कि सोनाक्षी के पिता शत्रुध्न और मां पूनम ने अपनी लाडली बिटिया को कड़े निर्देश दे रखें है कि बॉलीवुड में कामयाबी मिले या नहीं, फिल्में टिकट खिड़की पर चले या नहीं, लेकिन उनका अंग प्रदर्शन पूरी तरह वर्जित है. यही वजह है कि ईद के मौके पर उनकी रिलीज होने जा रही पहली फिल्म दबंग में वे सीधी-सादी लड़की की भूमिका में है. खास बात यह है कि इस फिल्म में मलाइका अरोरा एक तड़कता-भड़कता आइटम नंबर कर रही है, लेकिन सोनाक्षी की भूमिका एक दम सीधी-सरल है. ऐसे में मानना पड़ेगा कि इंडस्ट्री में कड़क छवि के लिए जाने जाने वाले बिहारी बाबू यानी शत्रुध्न सिन्हा ने अपने घर में भी अनुशासन बनाए रखा है.

सलमान-कैट का ब्रेकअप प्लान



बॉलीवुड का एक पुराना दस्तुर है ः जब भी कोई फिल्म रिलीज होने वाली हो, तो नायक या नायिका के रोमांस या फिर ब्रेकअप की खबरें उड़ा दो. इससे होता यह है कि बिना पैसा खर्च किए मुप्त की पब्लिसिटी मिल जाती है और फिल्म का भी फायदा हो जाता है. खासकर आजकल तो बॉलीवुड में यह हर दूसरी फिल्म के साथ होता है. आजकल जब भी कोई नई फिल्म रिलीज होती है, तो उससे पहले उस फिल्म के नायक या नायिका से जुड़ी बातें सामने आने लगती है. खास बात यह है कि फिल्म की रिलीज के तत्काल बाद ही इस तरह की बातों पर विराम भी लग जाता है.
सो, आजकल भी कुछ यही हो रहा है. इस बार मामला जुड़ा है सलमान खान और उनकी प्रेमिका कैटरीना कैफ से. वैसे तो इन दोनों की प्रेम कहानी हमेशा ही सुर्खियों में रहती है, लेकिन आजकल जरा ज्यादा है, क्योंकि कहा जा रहा है कि दोनों के बीच ब्रेकअप हो चुका है. सलमान ने हाल ही में एक टीवी चैनल में बताया कि उनका कैटरीना से अलगाव हो चुका है और कुछ ऐसी ही बात कैटरीना ने भी कही. अब माजरा समझने के लिए पहले यह जान लीजिए कि 10 सितंबर को सलमान की एक बड़े बजट की फिल्म रिलीज होने वाली है दबंग. इससे पहले सलमान के खातें में वीर और मै और मिसेस खन्ना जैसीे नाकाम फिल्में दर्ज है, सो उन्हें एक हिट की सख्त जरूरत है. एक बात और ः सलमान या कैटरीना की जब भी कोई फिल्म रिलीज होेने को होती है ,तो साथ ही उनके ब्रेकअप की खबरेें भी आ जाती है. वीर की रिलीज के मौके पर यही हुआ था. कैटरीना की राजनीति और अजब प्रेम की गजब कहानी की रिलीज के दौरान भी यही हुआ था.
तो, इस बार भी सलमान-कैटरीना के ब्रेकअप की खबरें सुर्खियों में है. देखते हैं कि इस बार इन प्रचारित बातों से सलमान की दबंग फिल्म को कितना फायदा पहुंचता है.

आमिर करेंगे खलनायकी !!!



आमतौर पर मुंबईयां फिल्में नायक-नायिका की वजह से चर्चित होती है, लेकिन यशराज कैंप के बैनर तले 2004 में आई फिल्म धूम अपने खलनायकों की वजह से सुर्खियों में रही है. धूम में नायक तो अभिषेक बच्चन और उदय चैपड़ा थे, लेकिन सबसे ज्यादा तारीफे बटोरी थी फिल्म के खलनायक जॉन अब्राहम ने. बाईक के दीवाने चोर के किरदार में जॉन ने कहर ढा दिया था. इसके बाद जब 2006 में धूम 2 रिलीज हुई, तो इसमें नायक तो वहीं थे, लेकिन इस बार खलनायक की भूमिका में रितिक रोशन नजर आएं. जॉन अब्राहम की तरह ही रितिक ने भी अपनी अदाओं और अभिनय के चलते फिल्म के नायकों से भी ज्यादा तारीफें बटोरी.
धूम का जिक्र इसलिए हो रहा है, क्योंकि खबरें है कि अब जल्द ही धूम 3 भी बनने वाली है. इसमें भी बड़ी खबर यह है कि इस बार फिल्म में खलनायक की भूमिका में आमिर खान दिखाई देंगे. जी हां, मिस्टर परफेक्सनीस्ट आमिर ! वैसे तो शाहरूख खान के चलते आमिर और चैपड़ाओं में ज्यादा बनती नहीं है. लेकिन धूम सीरीज के खलनायक ही इतने स्टाइलिश होते हैं कि आमिर का भी इस रोल पर दिल आ गया है. इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि वे जल्द ही धूम 3 में खलनायकी करते दिखाई देंगे.

Friday, August 20, 2010

फिल्म समीक्षा ः लफंगे परींदे



मुंबई में टपोरीे बोली स्थानीय तौर पर बोली जाती है, लेकिन देश के कोने-कोने से आए संभा्रंत परिवार के निर्देशकों को भी इस बोलीे ने खूब आकर्षित किया है. राम-लखन, किशन-कन्हैया, तेजाब जैसी फिल्मों में आमिर खान, मुन्नाभाई सीरीज की फिल्मों में संजय दत्त और रामगोपाल वर्मा की क्लासिक रंगीला और विक्रम भट्ट की गुलाम में आमिर खान ने इस बोली को इतने प्रभावी अंदाज में बोला था कि दर्शक आज भी इन फिल्मों की मिसाल दिया करते हैं. कॅरिअर में परीणीता और लागा चुनरी में दाग जैसी पारिवारिक फिल्में बनाने वाले प्रदीप सरकार यशराज कैंप के लिए तीसरी फिल्म लेकर आए हैं लपफंगे परींदे, जिसमें भी हीरों मुंबईया टपोरी बोलता नजर आता है. लेकिन अफसोस कि फिल्म की खूबी बस इसी बात पर खत्म हो जाती है. फिल्म के प्रोमो देकर उम्मीद बंधी थी कि यह दो लोगों की जंगली प्रेम कहानी है, लेकिन फिल्म देखने जाने पर पता चलता है कि इसमें सत्तर-अस्सी के दशक के फॉर्मूलों को ही अपनाया गया है. हीरों हिंसक और आवारा है, हीरोईन अंधी है, लेकिन उसकी अपनी महत्वाकांक्षाएं है. दोनों एक साथ होते हैं तो मिशन बन जाता है. लेकिन साथ हुए हैं तो इसकी कीमत तो चुकानी पड़ेगी. नील-नीतिन मुकेश और दीपिका पादुकोण भी चुकाते हैं यह कीमत. लेकिन दिक्कत यह है कि ऐसा हिंदी फिल्मों में हम हजार बार देख चुके हैं.
एक और बात नायक नील नीतिन मुकेश कहीं से भी टपोरी नहीं लगते. असल में उनका व्यक्तित्व इस तरह का है ही नहीं कि वे इस तरह की भूमिकाओं में जम पाएं. उनके चेहरे से ही रईसी टपकती है, सो वे लाख कोशिश करके भी टपोरी की भूमिका को अच्छे से नहीं निभा पाते हैं. जहां तक दीपिका का सवाल है, तो किरदार तो उन्होंने दृष्टिहीन नायिका का निभाया है, लेकिन कपड़े वे इस कदर फेशनेबल पहनती है कि आजकल मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों की आंखों वाली युवा लड़कियां भी इस तरह के कपड़े शोरूम से चुन न पाएं. कूल मिलाकर लफंगे परींदे किसी भी एंगल से प्रभावित नहीं कर पाती है.

Thursday, August 19, 2010

मुगले-आजम के 50 बरस



दुनिया के सबसे बड़े फिल्म उद्योग के तौर पर स्थापित बॉलीवुड में हर साल तीन सौ से भी ज्यादा फिल्में बनती है. इनमें से ज्यादातर फिल्में बड़े सितारों, स्थापित निर्माता-निर्देशकों से सजी होती है. बावजूद इसके साल में तीन सौ से ज्यादा फिल्में बनाने वाले बॉलीवुड की अस्सी फीसदी से ज्यादा फिल्में टिकट खिड़की पर नाकाम ही साबित होती है. इतना ही नहीं, मल्टीप्लेक्स के इस दौर में बड़ी से बड़ी कामयाब फिल्में भी चार-पांच हप्तों से ज्यादा नहीं चल पाती है. ऐसे में अगर कोई फिल्म पचास साल बाद भी दर्शकों की यादों में बनी रहे, तो फिर उसे भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ पिफल्म मानने से परहेज नहीं होना चाहिए.
ऐसी ही एक सदाबहार फिल्म मुगले-आजम ने 5 अगस्त 2010 को अपने पचास साल पूरे कर लिए. निर्देशक के. आसिफ की इस महान फिल्म के पचास साल पूरे करना कोई मामूली बात नहीं है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा के गौरमयमी इतिहास में एक और मिल का पत्थर है. 5 अगस्त 1960 को देशभर के 150 सिनेमाघरों में रिलीज हुई मुगले-आजम अपने गीत-संगीत, भव्यता, यादगार अभिनय के चलते युवा पीढ़ी के दर्शकों को भी उसी तरह आकर्षित करती है, जिस तरह वह भारतीय सिनेमा को करीब से देखने वाली बुजुर्ग पीढ़ी के दिलों में बसी हुई है. ऐसे में, मुगले-आजम की स्वर्ण जयंती के इस मौके पर इस महान फिल्म से जुड़ी कई अनछुई बातों को याद करना लाजिमी ही हो जाता है.
तो, मुगले-आजम की असल कहानी 1944 से शुरू होती है, जब निर्देशक के. आसिफ ने पहली बार मुगल शहजादे सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी को फिल्मी पर्दे पर उकेरने का ख्वाब संजोया था. तब के. आसिपफ की इस फिल्म में महालक्ष्मी स्टूडियों के मालिक शिराज अली पैसा लगाने वाले थे. के. आसिफ ने बादशाह अकबर, शहजादे सलीम और अनारकली की भूमिकाओं के लिए क्रमशः चंद्रमोहन, सप्रु और नरगिस का चयन किया था. लेकिन आजादी की जद्दोजहद और चंद्रमोहन की मौत के चलते यह योजना अधर में ही रह गई. आजादी के बाद के. आसिफ ने अपने ख्वाब को पूरा करने का एक और प्रयास किया, लेकिन तब तक भारत विभाजन के बाद शिराज अली पाकिस्तान में बस गए थे. लेकिन के. आसिफ तो किसी भी कीमत पर सलीम-अनारकली की प्रेम कहानी को बड़े पर्दे पर लाने के लिए दृढ़संकल्पित थे. नतीजतन, उन्होंने नए सिरे से निर्माता की तलाश शुरू कर दी. चंद महीनों के इंतजार के बाद देश के ख्यात उद्योपगति शापुरजी पलोनजी के रूप में कें.आसिफ को वह शख्स मिल ही गया, जो उनके ख्वाब को पूरा करने जा रहा था. चूंकि तब तक चंद्रमोहन की मौत हो चुकी थी, इसलिए के. आसिफ ने नए सिरे से कलाकारों की खोज शुरू की. आखिर में बादशाह अकबर, शहजादे सलीम और अनारकली की भूमिकाओं के लिए क्रमशः पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कूमार और मध्ुाबाला को लिया गया. यहीं से शुरू हुई मुगले-आजम के बनने की कहानी. के. आसिफ अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म को इस तरह फिल्माने का मन बना चुके थे, जैसा इंडस्ट्री में पहले कभी नहीं हुआ था. सो, मुगले-आजम को भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य फिल्म बनाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी. फिल्म में लड़ाई के दृश्यों में मुगल जमाने की वास्तविकता दिखाने के लिए 2000 ऊंटों, 4000 घोड़ों और 8000 सैनिकों का इंतजाम किया गया. कलाकारों के कपड़ों के लिए दिल्ली से दर्जी बुलाए गए, एंब्रायडरी के लिए सूरत से कारीगर बुलाए गए, आभूषणों के लिए जयपूर से कारीगरों का इंतजाम किया गया. इतना ही नहीं, लड़ाई के दृश्यों को असल बनाने के लिए भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय से विशेष इजाजत लेकर सेना के जवानों को भी बुलाया गया. इसके लिए जयपूर रेजीमेंट के जवानों ने फिल्म के लड़ाई के दृश्यों में हिस्सा लिया. के. आसिपफ ने अपनी इस महत्वाकांक्षी फिल्म में हर विभाग में दिल खोलकर खर्चा किया. फिल्म में तानसेन के दो गीतों को गाने के लिए विशेषतौर पर शास्त्राीय गायक बड़े गुलाम अली खाम साहब से अनुरोध किया. लेकिन दिक्कत यह थी कि महान खाम साहब फिल्मों को कतई पसंद नहीं करते थे. निर्माता शापुरजी और के. आसिफ की हर बात उन्होंने नकार दी. टालने के लिए कह दिया गया कि खाम साहब गाने के लिए 25 हजार रूपए लेंगे. लेकिन के. आसिफ भी भला कहां पीछे हटने वाले थे. आखिर में दो गीतों शुभ दिन आयो और प्रेम जोगन बनके के एवज में खाम साहब को 25 हजार रूपए ही दिए गए, जबकि उस जमाने में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी भी एक गीत का पारिश्रमिक 300 सौ रूपए लेते थे. इस तरह के. आसिफ ने ध्माकेदार अंदाज में फिल्म की शूटिंग शुरू की. लेकिन तभी 1953 में भारतीय सिनेमा में एक ऐतिहासिक घटना घट गई. इस साल झांसी की रानी नामक फिल्म रिलीज हुई, जो भारतीय सिनेमा की पहली रंगीन फिल्म थी. इस फिल्म ने के. आसिफ की महत्वाकांक्षाओं को और ज्यादा बढ़ा दिया. अब के. आसिफ ने भी ठान लिया कि वो भी अपनी पिक्चर को रंगीन बनाएंगे. लेकिन तब तक निर्माता शापुरजी और वितरकों के सब्र का बांध चुका था. उन्होंने के. आसिफ को निर्देश दे दिए कि अब फिल्म को बिना देर किए पूरा कर दिया जाए. आखिर में समझौता यह हुआ कि कुछ रीलें रंगीन में फिल्माई जाए. नतीजा यह रहा कि कूल तीन रीलें रंगीन फिल्माई गई, जिसमें प्यार किया तो डरना क्या गाना भी शामिल था. प्यार किया तो डरना क्या गाने को विख्यात शीशा महल में फिल्माया गया. जिस पर 10 लाख रूपए का खर्च आया. इस तरह जब 5 अगस्त 1960 को फिल्म रिलीज हुई तो उसमें 15 फीसदी हिस्सा रंगीन था और 85 फीसदी हिस्सा श्वेत-श्यााम था. पूरी फिल्म 17 लाख रूपए में बनी, जबकि तब फिल्में ज्यादा से ज्यादा 2.3 लाख रूपए में बन जाया करती थी.
फिल्म रिलीज हुई, तो दर्शकों ने भी के. आसिफ की मेहनत से बनाई गई मुगले-आजम को सिर आंखों पर बिठा लिया. देश के 150 सिनेमाघरों में मुगले-आजम रिलीज हुई और 100 सप्ताह तक चलने का कीर्तिमान बनाया. 1970 में आई शोले से पहले तक मुगले-आजम ही बॉलीवुड की सबसे कामयाब फिल्म थी और आज भी यह भारतीय सिनेमा की दूसरी सबसे कामयाब फिल्म है.
2004 में मुगले-आजम के साथ एक और उपलब्ध् िजुड़ गई, जब फिल्म के निर्माताओं ने इसे पूरी तरह रंगीन संस्करण में रिलीज किया. इसके लिए एक साल की मेहनत की गई, दृश्यों को फिर से रंगीन किया गया. 2004 में दीवाली के मौके पर मुगले-आजम यश चैपड़ा की वीर जारा, रामगोपाल वर्मा की नाच और अब्बास-मस्तान की एतराज जैसी बड़ी फिल्मों के साथ रिलीज हुई. बावजूद इसके मुगले-आजम का रंगीन संस्करण भी दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रहा. फिल्म इस बार भी 25 सप्ताह तक चली. भारतीय सिनेमा ही नहीं, विश्व सिनेमा में भी यह पहला मौका था, जब किसी फिल्म को रंगीन करके दोबारा रिलीज किया गया.
वहीं, मुगले-आजम अब पचास बरस की हो गई है. लेकिन उसकी यादें अभी भी करोड़ों हिंदुस्तानियों के दिलों में बसी हुई है. महान फिल्मों की यही पहचान होती है कि वे कभी भी अप्रासंगिक नहीं होती. और मुगले-आजम इस कसौटी पर भी खरी उतरती है.

जन्मदिन विशेष ः गुलजार



ब्रिटिश राज के अधिन भारत के पंजाब के झेलुन जिलें में 18 अगस्त 1936 को जन्में संपूरणसिंह कालरा अर्थात गुलजार का नाम भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेश्ठ निर्देशकों की सूची में शामिल किया जाता है. 1963 में बिमल राय की फिल्म बंदिनी के साथ गुलजार साहब के फिल्मी कॅरिअर का बतौर गीतकार आगाज हुआ. और अपने पहले ही काम में उन्होंने उस बुलंदी को छू लिया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है. इस फिल्म में उनके द्वारा लिखा गया गीत मोरा गोरा रंग लई ले आज भी भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ गीतों में शुमार किया जाता है. इसी फिल्म से महान गीतकार एसडी बर्मन के साथ गुलजार साहब का जो रिश्ता बना, तो ताउम्र कायम रहा. इस रिश्ते को सीनियर बर्मन के बेटे आरडी बर्मन ने भी खूब निभाया. बाद के सालों में गुलजार साहब ने जितनी भी फिल्में निर्देशित की, उन सभी में संगीत आरडी बर्मन ने ही दिया. बतौर निर्देशक अपने कॅरिअर का आगाज गुलजार साहब ने 1971 में आई फिल्म मेरे अपने से किया. बतौर निर्देशक भी उन्होंने पहली ही फिल्म में अमिट छोड़ी और यह फिल्म आज भी भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में शुमार होती है. इसके बाद तो सत्तर के दशक में गुलजार का जादू सिर चढ़कर बोला. इस दशक मेंें गुलजार साहब ने परिचय-1972, कोशिश-1972, अचानक-1973, आंधी-1985, मौसम-1975, खूशबू-1975 और किताब-1977 जैसी श्रेष्ठ फिल्में दी.
गुलजार साहब की महानता सिर्फ निर्देशक के दायरें तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे बॉलीवुड के सर्वश्रेष्ठ हरफनमौला गिने जाते हैं. बतौर लेखक, बतौर गीतकार भी गुलजार साहब की उपलब्धियां उन्हें महानतम फिल्मी शख्सियतों की सूची में सबसे ऊपर रखती है. बतौर गीतकार भी एआर रहमान और विशाल भारद्वाज जैसी हस्तियों के साथ मिलकर उन्होंने छैया छैया, बीड़ी जलाइले जैसे अद्भूत गाने दिए हैं. बतौर टेलीविजन लेखक भी गुलजार साहब के नाम पर मोगली का चड्डी पहनके फूल खिला है जैसी महान रचनाएं शामिल है.
और फिर गुलजार साहब की महानता इसलिए भी है कि उन्होंने बदलते वक्त के साथ खूद को बखूबी ढाल लिया. न जाने कितनी फिल्मी हस्तियां बदलते वक्त के साथ सामंजस्य न बना पाने की वजह से भूला दी गई, लेकिन गुलजार साहब आज भी बॉलीवुड की श्रेष्ठ शख्सियतों में गिने जाते हैं, तो सिर्फ इसीलिए कि उन्होंने बदलते वक्त के साथ बखूबी तालमेल बिठा लिया. यह गुलजार साहब की महानता का प्रमाण ही है कि मोरा गोरा रंग लई ले जैसा महान क्लासिक गीत लिखने के साथ ही वे छैया छैया और बीड़ी जलाइले, कजरारे-कजरारे जैसे चलताउ गाने भी बड़ी श्रेष्ठता के साथ लिख देते हैं.
तो, अब यही गुलजार साहब आज 74 बरस के हो गए हैं. लेकिन उनका सफर अभी भी जारी है. एआर रहमान, मणिरत्नम, विशाल भारद्वाज जैसे नई पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ लोगों के साथ उनकी जुगलबंदी आज भी उनके प्रशंसकों का दिल जीत लेती है. इस मौके पर गुलजार साहब के करोड़ों प्रशंसकों के साथ हम भी यही दुआ करेंगे कि आने वाले कई सालों तक उनकी कलम की धार इसी तरह हमारे दिलों को लुभाती रहे.

ईशा कोपेकर की हेलो डार्लिंग



इतिहास गवाह है कि अगर काजोल को छोड़ दिया जाए, तो बॉलीवुड में कोई भी हीरोईन शादी के बाद कामयाब पारी नही ंखेल पाई. पहली बात तो यह कि शादी के बाद उनकों फिल्में ही नहीं मिलती और अगर भूले-भटके मिल भी गई, तो वे उन फिल्मों में नायक-नायिका की चाचाी, मामी की भूमिकाओं में नजर आती है. श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, जूही चावला जैसी हीरोईनें इसकी मिसाल है. और अब शादीशुदा जिंदगी के बाद फिल्मों में वापसी करने वाली अभिनेत्रियों में एक और नाम जुड़ गया है. यह अभिनेत्री है ईशा कोपेक्कर. जी हां, वहीं कंपनी की खल्लास गर्ल और क्या कूल है हम की बिंदास उर्मिला मारतोड़कर. हाल ही में अपने प्रेमी रोहित नारंग के साथ विवाह रचाने वाली ईशा जल्द ही एक फिल्म में दिखाई देंगी. हेलो डार्लिंग नामक यह फिल्म सुभाष घई के बैनर तले बनी है, जिसमें ईशा अन्य दो अभिनेत्रियों सेलीना जेटली और गुल पनाग के साथ कॉमेडी करती दिखाई देंगी. फिल्म लंबे समय से रिलीज के लिए तरस रही है ,लेकिन फिर भी ईशा को उम्मीद है कि यह फिल्म उनके कॅरिअर को मजबूती देगी. अब देखना यह है कि 27 अगस्त को रिलीज होने जा रही इस फिल्म में दर्शक एक और शादीशुदा अभिनेत्री को झेल पाते हैं या फिर अन्य शादीशुदा अभिनेत्रियों की तरह ईशा भी खारिज कर दी जाएगी.

किम शर्मा की शादी



किम शर्मा यानी वहीं मोहब्बतें वाली हीरोईन, आजकल फिर से चर्चाओं में है. चर्चाएं उनकी फिल्मों को लेकर नहीं है, क्योंकि उनके कॅरिअर का तो सालों पहले ही बंटाढार हो चुका है. दरअसल, हाल-फिलहाल इंडस्ट्री में किम शर्मा को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. यह कयास उनकी शादी को लेकर है. जी हां, चर्चाएं है कि किम शर्मा ने अपने दक्षिण अफीकी दोस्त के साथ गुपचाप विवाह रचा लिया है. किम की गुपचुप शादी को लेकर चर्चाएं इसलिए हो रही है क्योंकि 2000 में आदित्य चैपड़ा के निर्देशन में बनी फिल्म मोहब्बतें से अपने कॅरिअर का आगाज करने वाली किम पहली फिल्म के बाद से ही अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने रोमांस को लेकर चर्चाओं में रही है. रोमांटिक स्वभाव की किम का सबसे ज्यादा लंबा रोमांस भारतीय क्रिकेटर युवराजसिंह के साथ चला. पिछले कई साल से वे दोस्त रहे और बीच-बीच में तो यह अटकलें भी लगाई गई थी कि किम जल्द ही युवराजसिंह के साथ शादी रचाने वाली है. लेकिन अफसोस कि युवी के साथ किम का रिश्ता अधर में ही लटक गया. हाल ही में एक बार फिर खबरें आई थी कि युवी और किम वापस एकसाथ हो गए हैं, लेकिन अब दक्षिण अफीकी दोस्त के साथ विवाह की खबरों ने किम की रोमांटिक जिंदगी को फिर सुर्खियों में ला दिया है. वैसे भी किम का फिल्मी कॅरिअर तो पिछले कईं साल से ठंडा पड़ा हुआ है. हाल ही में वे देशद्रोही जैसी सी-ग्रेड की फिल्म में आईटम सांग करती नजर आई. डेडी कूल नामक फिल्म में भी किम छोटी भूमिका में दिखाई दी थी, लेकिन अब तीस साल की हो चुकी किम के लिए बॉलीवुड में दरवाजे पूरी तरह बंद ही हो गए हैं.
उधर, क्रिकेट के मैदान में युवी का जलवा भी खत्म हो चुका है. ऐसे में युवी को धता बताकर अगर किम ने सच में विवाह कर लिया है, तो यह समझदारीभरा फैसला ही कहा जाएगा.

Wednesday, August 18, 2010

अब विद्या करेगी आईटम नंबर !!!



ऐसे वक्त में जबकि बॉलीवुड की नब्बे फीसदी से ज्यादा हीरोइनें अपने कॅरिअर को बनाए रखने के लिए नंगई पर उतर आई है, विद्या बालन जैसी अभिनेत्रियों से उनके प्रशंसकों को उम्मीद रहती है कि कम से कम वे अंग प्रदर्शन की इस भेड़चाल में शामिल नहीं होंगी. 2005 में प्रदीप सरकार की फिल्म परिणीता से अपने कॅरिअर का धमाकेदार आगाज करने वाली विद्या बालन ने अभी तक अपने कॅरिअर में गरिमामयी छवि को बनाए रखा. लगे रहो मुन्नाभाई, गुरू, एकलव्य, पा जैसी फिल्मों में दर्शकों ने उनके जिस्म की नुमाइश को नहीं, बल्कि उनके अभिनय को सराहा.
लेकिन अपने दमदार अभिनय के लिए जाने जानी वाली यह गरिमामयी अभिनेत्री भी अब बॉलीवुड में टिके रहने के लिए शार्टकट आजमाने का इरादा कर चुकी है. खबर है कि विद्या जल्द ही एक मलयालम फिल्म में आईटम नंबर करती दिखाई देंगी. भले हीे ऐश्वर्या राय जैसी अभिनेत्री भी कजरारे-कजरारे पर आइटम डांस कर चुकी है, फिर भी बॉलीवुड में यही माना जाता है कि आइटम नंबर ऐसी हीरोईनें करती है, जिनका कॅरिअर खत्म हो चुका है. जिनको पिक्चरें नहीं मिलती लीड हीरोईन के तौर पर जैसे कि शर्लीन चैपड़ा, राखी सावंत, मलाइका अरोरा, निगार खान आदि. लेकिन अब विद्या के इस भेड़चाल में शामिल होने से हर कोई हैरत में है. पिछले साल ही उन्होंने पा जैसी फिल्म में अपने उम्दा अभिनय से प्रशंसकों का दिल जीत लिया था. ऐसे में न जाने कौन सी मजबूरी है, जो विद्या भी ‘शर्लीन-राखी की राह पर चल पड़ी है. जाहिर है, इस खबर के बाद विद्या के अभिनय के कायल दर्शकों को निराशा ही हुई है. आखिर उनसे थोड़े ही ऐसे किसी आइटम सांग की उम्मीद की जाती है.

Tuesday, August 17, 2010

इस सप्ताह ः लफंगे परींदे


निर्माता ः यशराज बैनर
निर्देशक ः प्रदीप सरकार
कलाकार ः नील नीतिन मुकेश, दीपिका पादुकोण
कहानी ः इस फिल्म की कहानी मुंबई के बाइकर्स गैंग की है. नील नीतिन मुकेश बाइकर्स गैंग का सदस्य है. साथ ही वह रिंग में एक लड़ाके के तौर पर भी विख्यात है. नील की खूबी यह है कि वह अपने एक ही पंच से विरोधी को पस्त कर देता है. इसीलिए रिंग सर्कल में उसे वन शॉट नंदू कहते हैं. अपने दोस्तों और अपने इलाकें में वह दादा के तौर विख्यात है. लेकिन नंदू की जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है ,जब उसका सामना दीपिका पादुकोण से होता है. दीपिका अंधी है, लेकिन डांस में महारत हासिल है उसे. दोनों के दिल मिलते हैं तो मंजिले भी बन जाती है. लेकिन इन मंजिलों तक पहुंचने के लिए दोनों को किस कठिन रास्ते से गुजरना पड़ता है, यही कहानी है लफंगे परींदे की.
खास बात ः निर्देशक प्रदीप सरकार ने लंबे समय तक विज्ञापन फिल्में बनाई है. यशराज बैनर के साथ यह उनकी दूसरी फिल्म है. यशराज के लिए ही उन्होंने लागा चुनरी में दाग बनाई थी, जिसमें रानी मुखर्जी ने काम किया था. अपने कॅरिअर की पहली फिल्म उन्होंने विधु विनोद चैपड़ा के लिए बनाई थी परिणीता. फिल्म में सैफ अली खान ने काम किया था और पिक्चर हिट रही थी.

Friday, August 13, 2010

कंगना पर किस्मत मेहरबान



कहते हैं जब किस्मत मेहरबान होती है, तो पूरी तरह से हो जाया करती है. दिलकश अभिनेत्री कंगना राणावत के साथ इन दिनों यही हो रहा है. किस्मत उनके ऊपर पूरी तरह से मेहरबान है. चारों तरफ से बस कामयाबी ही कामयाबी मिल रही है उन्हें. कॅरिअर के मोेेेेर्चे पर बड़ी कामयाबी उन्हें हाल ही में मिली, जब उनकी फिल्म वंस अपान ए टाइम इन मुंबई बड़ी हिट साबित हुई. यह फिल्म दो सप्ताह में ही पचास करोड़ रूपए से ज्यादा की कमाई कर चुकी है और अभी भी हाउसफुल जा रही है. यह तो रही कॅरिअर की कामयाबी, लेकिन आजकल कंगना व्यक्तिगत जिंदगी में भी बेहद खुश है. वजह यह नहीं है कि उनका किसी के साथ रोमांस चल रहा है ,बल्कि वजह यह है कि आजकल वे अकेली है और इसके मजे भी ले रही है. गौरतलब है कि रोमांस के लंबे दौर के बाद पिछले साल ही कंगना का अध्ययन सुमन के साथ ब्रेकअप हो गया था. वह दौर कंगना के लिए मानसिक तौर पर बेहद मुश्किल था ,लेकिन अब अपने काम के जरिए वे इससे भी उबर गई है. बड़ी बात यह है कि कामयाबी के इस दौर में वे अपना ध्यान प्रेम-प्रसंगों में नहीं बंटाना चाहती, बल्कि पूरी तरह से कॅरिअर को लेकर गंभीर है.
जाहिर है, अब कंगना बदली-बदली नजर आ रही है. बॉलीवुड में 2006 में गैंगस्टर फिल्म से ही उन्होंने धमाकेदार आगाज किया था, लेकिन तब आंदित्य पंचोली और फिर अध्ययन सुमन के साथ प्रेम प्रसंगों के चलते वे अपने कॅरिअर को सही ढंग से दिशा नहीं दे पाई. लेकिन अब वे इसकी भरपाई करने को पूरी तरह तैयार है.

जन्मदिन विशेष ः श्रीदेवी


बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि 13 अगस्त 1963 को तमिल परिवार में जन्मी श्रीदेवी ने अपने फिल्मी कॅरिअर की शुरूआत मात्र चार साल की उम्र में ही कर दी थी. कंधन करूणाई नामक इस फिल्म में श्रीदेवी ने भगवान शिव की भूमिका निभाई थी. युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते श्रीदेवी हर तरह की भाषा की फिल्मों में काम कर चुकी थी ः तमिल, तेलगु, कन्नड़. बॉलीवुड में श्रीदेवी को पहला ब्रेक मिला 1978 में आई फिल्म सोलहवां सावन से. लेकिन श्रीदेवी को टिकट खिड़की पर पहचान मिली 1983 में रिलीज हुई फिल्म हिम्मतवाला से, जिसमें उन्होंने जितेंद्र के साथ पहली बार काम किया. इसके बाद तो यह बॉलीवुड की सबसे कामयाब जोड़ियों में गिनी जाने लगी. जितेंद्र के साथ श्रीदेवी ने तोहफा, मवाली, जस्टिस चैधरी जैसी हिट फिल्में दी. श्रीदेवी की कामयाबी सिर्फ कर्मशियल फिल्मों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि 1983 में आई फिल्म सदमा के साथ उनकी अभिनय प्रतिभा का भी लोहा मान लिया गया. इस फिल्म में श्रीदेवी ने एक दिमागी पागल लड़की का रोल बखूबी निभाया था. इसी फिल्म में श्रीदेवी को कमल हसन जैसे तमिल फिल्मों के सुपरस्टार के साथ काम करने का मौका भी मिला. इसके बाद तो अस्सी के दशक में श्रीदेवी ने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी, जिनमें नगीना, कर्मा, सुहागन, जांबाज, जोशिले, मिस्टर इंडिया, चालबाज, चांदनी जैसी फिल्में शामिल है. इस दौरान श्रीदेवी ने मिथुन चक्रवर्ती, अनिल कपूर जैसे बड़े सितारेां के साथ भी खूब जोड़ी जमाई. 1992 में श्रीदेवी के कॅरिअर में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी, जब उन्हें हिंदी फिल्मों के सबसे बड़े महानायक अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला. लेकिन जब श्रीदेवी का कॅरिअर पूरी बुलंदी पर था, तभी उन्होंने निर्माता बोनी कपूर के साथ 1996 में शादी कर ली. इसके बाद श्रीदेवी ने 1997 में जुदाई जैसी हिट फिल्म दी और फिर उसके बाद शीर्ष पर रहते हुए बॉलीवुड को अलविदा कह दिया. चंद साल पहले वे राजकुमार संतोषी की फिल्म हल्ला बोल में मेहमान भूमिका में नजर आई थी, लेकिन कूल मिलाकर अब श्रीदेवी पारिवारिक जिंदगी में ही खूश हैं.

Thursday, August 12, 2010

इस सप्ताह ः हेल्प


निर्माता ः संजय आहलूवालिया, विनय चैकसे
निर्देशक ः राजीव विरानी
कलाकार ः बॉबी देओल, मुगधा गोडसे,
कहानी ः इस हॉरर पिक्चर की कहानी बॉबी देओल और मुगधा गोडसे के इर्द-गिर्द घूमती है. बॉबी हॉरर फिल्मों का स्थपित निर्माता है, और खतरनाक भूतिया फिल्मों के लिए जाना जाता है. गोडसे के साथ बॉबी के प्रेम संबंध प्रगाढ़ हो चुके हैं. तभी मुगधा के बीमार पिता की खबर पता चलती है. वे दोनों उनसे मिलने जाते हैं. लेकिन वहां जाकर दोनों को एक अदृश्य आत्मा का अहसास होता है. अब बॉबी और मुगधा की जान तभी बच सकती है, जब वो इस आत्मा की पहेली को सुलझा लें.
हेल्प को भारतीय सिनेमा की आज तक की सबसे डरावनी पिक्चर के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है. बॉबी देओल अपने लंबे कॅरिअर में पहली बार किसी हॉरर पिक्चर में काम करने जा रहे हैं.
खास बात ः मुगधा गोडसे ने इस फिल्म में खूब गर्मागर्म दृश्य दिए हैं. अपने चार फिल्म पुराने कॅरिअर में वे पहली बार बिकनी में नजर आई है.

बिपाशा का राज



बिपाशा बसु के प्रशंसकों के लिए एक अच्छी खबर ः बिंदास बंगाली बाला जल्द ही एक ऐसी फिल्म के सिक्वल में दिखाई देगी, जिसने अपनी रिलीज के समय पूरे देश को दीवाना बना लिया था. बात हो रही है 2004 में रिलीज हुई फिल्म मर्डर की. जी हां, मर्डर, यानी वह पिक्चर जिसमें मल्लिका शेरावत ने अपनी कातिल अदाओं से कहर ढा दिया था. वहीं पिक्चर जिससे बॉलीवुड को इमरान हाशमी जैसा अभिनेता मिला था, जो अपने अभिनय से ज्यादा अपनी हीरोइनों के साथ चुंबन दृश्यों को लेकर चर्चित रहता है. मर्डर की कहानी ही बोल्ड विषय पर आधारित थी. फिल्म में विवाहोत्तर संबधों को दिखाया गया था और जाहिर है ऐसे विषयों पर बनने वाली फिल्मों में मल्लिका शेरावत जैसी जलवे बिखेरने वाली हीरोईन दूसरी नहीं है. इस फिल्म में मल्लिका और इमरान के बीच के अंतरंग दृश्य आज भी दर्शकों को यह फिल्म देखने के लिए मजबूर कर देते हैं.
चलिए अब बात आज की करते हैं. तो, बात यह है कि मर्डर फिल्म का जल्द ही सीक्वल बनने जा रहा है. मर्डर फिल्म भट्ट भाईयों ने बनाई थी और इसका निर्देशन अनुराग बासु ने किया था. अब खबर है कि मर्डर के सीक्वल का निर्माण तो भट्ट भाई ही करेंगे, लेकिन इसका निर्देशन मोहित सूरी ने किया था. सबसे बड़ी खबर यह कि इस सीक्वल में मल्लिका शेरावत के बजाए बिपाशा बसु दिखाई देंगी. जी, हां, बिपाशा एक बार फिर भट्ट कैंप में लौटने की तैयारी में है. भट्ट कैंप के साथ बंगाली बाला ने आखिरी बार जिस्म फिल्म में काम किया था. अब जबकि बिपाशा का कॅरिअर ढलने को है, वे भट्ट कैंप की फिल्म के जरिए फिर अपना जादू जगाना चाहती है. सो, दर्शक मर्डर के सीक्वल में भी बिपाशा से उम्मीद कर सकते हैं कि वे भी मल्लिका की तरह ही अपनी कातिल अदाओं से दीवाना बनाएंगी.

आमिर का कैम्प


बॉलीवुड की जब भी बात चलती है, तो खेमेबाजी का जिक्र सबसे पहले होता है. ख्ेामेबाजी का मतलब यह कि कौन सा हीरो, कौन सी हीरोईन और कौन सा निर्माता-निर्देशक किस खेमें में है. बॉलीवुड में हर दौर में खेमेबाजी चला करती है. दिलीप कुमार के जमाने में उनके पसंदीदा लोग राज कपूर और देवानंद के साथ काम नहीं करते थे. ऐसा ही देवानंद और राज कपूर के खेमें के लोग भी करते थे.
भले हीे कार्पोरेटीकरण हो गया हो, लेकिन बॉलीवुड में यह परंपरा आज भी कायम है. आज की बात करें तो बॉलीवुड में दो खेमें ही सबसे ताकतवर है. आमिर खान का खेमा और शाहरूख खान का खेमा. शाहरूख के खेमें में आते हैं करण जौहर, आदित्य चैपड़ा, अर्जुन रामपाल, जूही चावला आदि. ये लोग शाहरूख के खेमें के हैं, तो भूलकर भी आमिर के साथ काम नहीं करते.
उधर आमिर का खेमा किंग खान से कई गुना ताकतवर है. इसकी वजह यह कि भले ही आमिर के खेमें में चैपड़ा और जौहर नहीं है, लेकिन उनके खेमें में सलमान खान है. और सलमान खान के खेमें में तो आधा बॉलीवुड है, जिसमें रानी मुखर्जी, प्रिटी जिंटा, कैटरीना कैफ, रितेश देशमुख समेत कई बड़ी हस्तियां है. उधर आमिर के खेमें में भी राजकुमार हीरानी और विधु विनोद चैपड़ा जैसे दिग्गज फिल्मकार है.
बात खेमों की इसलिए हो रही है, क्योंकि हाल ही में अपनी नई फिल्म पिपली लाईव की स्क्रीनिंग के दौरान आमिर ने अपनी ताकत को खूलकर दिखाया. इस स्क्रीनिंग में सलमान, रानी मुखर्जी, विद्या बालन, राजकुमार हीरानी के साथ ही सचिन तेंदुलकर जैसी बड़ी हस्ती भी शामिल थी. जी हां, क्रिकेट के भगवान सचिन भी आमिर खान के सबसे करीबी दोस्तों में शुमार होते हैं.
उधर, शाहरूख का खेमा आजकल लगातार कमजोर होता जा रहा है. अब तो करण जौहर भी आमिर के साथ खूब दिखाई देने लगे हैं. रितेश देशमुख भी शाहरूख के कैंप से निकलकर सलमान के पास आ गए है. यहां तक कि विश्वसनीय फराह खान भी शाहरूख को छोड़कर आमिर-सलमान के साथ आ मिली है.
तो, वह जमाना गया जब बॉलीवुड में किंग खान के खेमें की तूती बोलती थी. अब बॉलीवुड में आमिर-सलमान की जुगलबंदी की तूती बोलती है और यह बात आमिर ने अपनी फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान साबित भी कर दी.

Wednesday, August 11, 2010

डिंपी महाजन का दूसरा रूप


राहुल महाजन के बारे में पूरा इंडिया जानता है कि दिवंगत भाजपा नेता प्रमोद महाजन का यह साहबजादा अक्सर विवादों से घिर जाया करता है. लेकिन अब लगता यह है कि राहुल की बीवी डिंपी महाजन भी अपने पतिदेव के नक्शेकदम पर ही चलने लगी है. डिंपी, जो पहले डिंपी गांगुली हुआ करती थी, ने इसी साल राहुल दुलहनिया ले जाएगा नामक एक मसखरे रियलिटी शो के जरिए राहुल को अपनी जीवनसंगीनी बनाया था. शादी को छह महीनें बीते नहीं कि अब डिंपी भी विवादों के केंद्र में रहने लगी है. पिछले दिनों ही धमाल मचा था, जब डिंपी ने इल्जाम लगाया था कि राहुल ने रात में ही उनकी पिटाई की. बेचारी आधी रात को ही घर छोड़ने को मजबूर हो गई, मीडिया के सामने नौटंकी भी कर दी. फिर पतिदेव राहुल आ गए, माफी भी मीडिया के सामने मांगी गई और सुलह भी हो गई.
अब इस ड्रामेबाजी के चंद दिनों बाद ही एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ है. बात यह है कि हाल ही में डिंपी महाजन के अतीत की कुछ बेहद अश्लील तस्वीरें इंटरनेट पर आई हैं. इन तस्वीरों से डिंपी के अतीत की जानकारी मिलती है. अतीत भी इतना रंगीला है कि कहें क्या ? तस्वीरों में डिंपी एक पार्टी में अपने दोस्तों के साथ दिखाई दे रही है. स्वीमिंगपूल में डिंपी अपने कुछ पुरूष मित्रों के साथ चिंदीनुमा कपड़ों में नजर आ रही है. यह तस्वीरें साबित करती है कि शादी से पहले डिंपी महाजन किस कदर रंगीन तबियत की थी. वैसे इस बात को जानते हुए कि डिंपी बंगाल की कई सी ग्रेड फिल्मों में आइटम नंबर कर चुकी है, यह फोटों कोई आश्चर्य जैसे तो नहीं है. फिर भी, राहुल का क्या भरोसा. इन तस्वीरों को देखते हुए कोई और हंगामा खड़ा कर दें.

Tuesday, August 10, 2010

प्रियंका ने मारी बाजी


भले ही उन दोनों ने अब्बास-मस्तान की फिल्म एतराज में एक साथ काम किया था, लेकिन जैसा कि होता है कि बॉलीवुड में दो हीरोईनों के बीच कभी नहीं जमती,, करीना कपूर और प्रियंका चैपड़ा भी एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाती. वजह वहीं पुरानी, आज की तारीख में बॉलीवुड में नंबर एक हीरोईन की दौड़ में कैटरीना कैफ, प्रियंका चैपडा और करीना कपूर ही सबसे आगे हैं. ऐसे में दोस्ती तो उनके बीच दूर की कोड़ी है. हां प्रतिद्वंद्विता खूब रहती है एक-दूसरे को पीछे छोड़ने की.
ऐसी ही प्रतिद्वंद्विता के बीच प्रियंका चैपड़ा ने करीना को एक करारा झटका दिया है. झटका यह कि आने वाले दो साल में प्रियंका सैफ अली खान के साथ एक दो नहीं, बल्कि पूरी चार फिल्में करने वाली है. हालांकि अभी तक प्रियंका ने सैफ के साथ एक भी फिल्म नहीं की है, लेकिन कुछ समय पहले एक विज्ञापन में दोनों ने काम किया था, जिसे खूब तारीफे मिली थी. इससे उत्साहित होकर और करीना से प्रतिद्वंद्विता के चलते वे आजकल उन फिल्मों को साईन करने में जुटी हुई है, जिनमें सैफ काम कर रहे हैं.
अपने इसी लक्ष्य के तहत प्रियंका सबसे पहले सैफ के साथ रेस पिक्चर के सिक्वल में नजर आएगी. रेस में बिपाशा बासु और कैटरीना ने काम किया था, लेकिन इसके सिक्वल में प्रियंका दिखाई देंगी. खास बात यह है कि रेस 2 में करीना भी है, लेकिन वे जॉन अब्राहम की नायिका बनी है, जबकि प्रियंका सैफ की. इसके बाद प्रियंका सैफ के साथ जिस पिक्चर में दिखाई देगी, उसका निर्देशन विशाल भारद्वाज करने वाले हैं. सैफ के साथ तीसरी पिक्चर जो प्रियकंा ने साईन की है, उसे सिधार्थ आनंद निर्देशित करेंगे, जो पहले सैफ के साथ सलाम नमस्ते जैसी हिट पिक्चर दे चुके हैं.
इस तरह, सैफ के साथ ढेर सारी फिल्में साईन करके प्रियंका ने करीना को कड़ी टक्कर तो दे ही दी है.

कल्की के अंतरंग दृश्य


याद कीजिए कल्की कोचिन को, वहीं नायिका जिसने अनुराग कश्यप की विवादास्पद और क्लासिक फिल्म देव डी में अपनी कातिल अदाओं से सबको दीवाना बना लिया था. कल्की की एक पहचान यह भी है कि वे अनुराग कश्यप की प्रेमिका है और दोनों लंबे समय से लिव इन रिलेशनप को अपनाएं हुए हैं.
सो, यही कल्की आजकल चर्चाओं में है इसलिए कि जल्द ही उनकी एक फिल्म देट गर्ल इन यलो बूट्स रिलीज होने वाली है. इस फिल्म को कल्की ने अनुराग के साथ मिलकर लिखा है. इसका निर्देशन अनुराग ने किया है और यह फिल्म वेनिस इंटरनेशल फिल्म फेस्टिवल में खूब तारीफें भी पा चुकी है.
लेकिन अब इस फिल्म को लेकर विवाद यह जुड़ गया है कि इसके कुछ अंतरंग दृश्य रिलीज से पहले ही इंटरनेट पर पहुंच गए हैं. बात यह है कि अनुराग की फिल्मों में सेक्स दृश्य तो हमेशा ही होते हैं, लेकिन इस फिल्म में जरा ज्यादा ही है क्योंकि कल्की एक ऐसी लड़की का रोल कर रही है जो मसाज सेंटर में काम करती है. जाहिर है, फिल्म में अंतरंग दृश्य तो होंगे ही. यही अंतरंग दृश्य इंटरनेट पर आ गए हैं, सो हंगामा खूब मच रहा है.

जन्मदिन विशेष ः सुनील शेट्टी


11 अगस्त 1961 को महाराष्ट्रीयन परिवार में जन्में सुनील शेट्टी को मुंबईयां फिल्मों का दूसरा ही मेन कहा जाता है, तो इसके पीछे नब्बे के दशक में आई उनकी वे ढेरों फिल्में है, जिनमें सुनील ने एक्शन फिल्मों की परिभाषा नए सिरे से लिखी. 1992 में अपनी पहली फिल्म बलवान के साथ जब सुनील ने बॉलीवुड में पदार्पण किया था, तब तक इंडस्ट्री में हीमेन का दर्जा सिर्फ और सिर्फ धरम पाजी को ही मिला हुआ था. लेकिन अपनी पहली ही फिल्म में सुनील ने अपने कसरती बदन के वो जलवे दिखाए कि हर कोई इस नए एक्शन हीरों का मुरीद हो गया. असल में नब्बे का दशक वह दौर था, जब बॉलीवुड बदलाव के दौर से गुजर रहा था. अमिताभ बच्चन खारिज किए जा चुके थे और एक्शन फिल्मों का जमाना चल रहा था. ऐसे वक्त में सुनील शेट्टी का कसरती बदन उनके अभिनय से भी ज्यादा काम आया. 1992 में रिलीज हुई उनकी पहली ही फिल्म बलवान हिट रही और इसके साथ एक्शन फिल्मों को नया सितारा भी मिल गया. इसके बाद 1993 में भी सुनील ने अंत और वक्त हमारा है जैसी हिट फिल्में दी. इस साल में सबसे खास बात यह रही कि वक्त हमारा है में वे पहली बार अक्षय कुमार के साथ नजर आए. यह वह दौर था जब अक्षय भी खुद को एक एक्शन हीरों के तौर पर स्थापित करने की कोशिश में थे. दोनों की जुगलबंदी हिट रही और यह फिल्म भी. इसके बाद इस जोड़ी ने 1994 में भी मोहरा जैसी हिट फिल्म दी. बेहतरीन संगीत और उम्दा एक्शन दृश्यों के चलते मोहरा 1994 की सबसे कामयाब फिल्म साबित हुई. 1994 में ही सुनील शेट्टी ने दिलवाले और गोपी किशन जैसी हिट फिल्में भी दी. इस तरह 1994 सुनील के कॅरिअर का सबसे कामयाब साल साबित हुआ. एक्शन फिल्मों में अपनी पहचान बना चुके सुनील को अब एक उम्दा अभिनेता के तौर पर पहचाने जाने की दरकार थी और यह हुआ 1997 में आई फिल्म बार्डर से. देशभक्ति पर आधारित जेपी दत्ता की इस फिल्म में सुनील ने अपने अभिनय से भी सबकों दीवाना बना दिया. 2000 में उनके कॅरिअर में एक और निर्णायक मोड़ आया, जब उनकी फिल्म हेराफेरी रिलीज हुई. हेराफेरी एक कॉमेडी फिल्म थी और इसने सुनील को एक बेहतरीन कॉमेडीयन के तौर पर भी स्थापित कर दिया. इसके बाद से अब तक सुनील शेट्टी ने फिर हेराफेरी, आवारा पागल दीवाना, दे दना दन, दीवाने हुए पागल जैसी कई कॉमेडी फिल्में दी है, जो टिकट खिड़की पर भी कामयाब रही.
इन्हीं अलग-अलग भूमिकाओं के चलते बॉलीवुड में सुनील शेट्टी कों हरफनमौला अभिनेता के तौर पर जाना जाने लगा है. नंबर एक की दौड़ में तो वे कभी नहीं रहे, लेकिन दो दशक के अंतराल में दर्शकों ने उनकी फिल्मों को हमेशा सराहा. इस साल रिलीज हुई फिल्म रेड अलर्ट में भी उनके अभिनय को खूब सराहा गया. आजकल वे ज्यादा फिल्में करने के बजाए अच्छे रोल वाली कम फिल्में करते हैं. उम्र के पांचवे दशक से एक साल पीछे खडे बॉलीवुड के इस हीमेन को जन्मदिन पर ढेरो बधाईयां.

अजब सल्लू की गजब प्रेम कहानी !


फिल्मी कॅरिअर का कुछ भी होता रहे, लेकिन जहां तक सलमान खान की रोमांटिक जिंदगी का सवाल है, तो इसमें कब अप्रत्याशित मोड़ आ जाएं. कहा नहीं जा सकता. वे जब भी किसी से प्यार करते हैं, तो टूटकर करते हैं. लेकिन कब उनका मन बदल जाए, कब वे अपनी वर्तमान प्रेमिका को छोड़कर पुरानी के पास चले जाएं या नई प्रेमिका बना लें, कोई भरोसा नहीं. सोमी अली, संगीता बिजलानी से लेकर ऐश्वर्या राय तक हर जगह सलमान मियां ने यही कहानी दोहराई.
और अब अपनी मौजूदा प्रेमिका कैटरीना कैफ के मामलें में भी यही हो रहा है. पिछले चार सालों से कैट ने कहा तो कुछ नहीं,, लेकिन उनकी आंखें और हाव-भाव बयां करते हैं कि वे सल्लू मियां की कितनी करीबी हैं. सलमान जोधपुर हिरण कांड में जेल गए, तो कैट वहां भी गई, सल्लू मियां के घर में कोई कार्यक्रम होता है, तो कैट वहां भी मौजूद रही है.
लेकिन अब इस कहानी में ट्वीस्ट आ गया है. हाल ही में सलमान खान ने अपने छोटे भाई अरबाज और बहन अर्पिता के जन्मदिन के मौके पर एक शानदार पार्टी दी. इस पार्टी में कई धमाके हुए ः जैसे कि अमीषा पटेल अपने बिछुड़े भाई के साथ नजर आई, शाहरूख कैम्प की कुछ हस्तियां भी इस पार्टी मे नजर आाई.
लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा इस पार्टी में कैटरीना कैफ की गैरमौजूदगी. जी हां, कैट इस पार्टी से नदारद थी. ऐसा भी नहीं था कि वे मुंबई से बाहर थी. वे मुंबई में ही शूटिंग कर रही थी, बावजूद इसके सलमान की पार्टी में नहीं आई केट.
चलिए अब इसकी वजह जानते हैं. हुआ यह है हाल ही में कि सलमान की पूर्व प्रेमिका संगीता बिजलानी का अपने पति मोहम्मद अजहरूद्दीन से अलगाव हो गया है. अजहर इन दिनों किसी दूसरी कन्या के प्यार में पड़े हुए हैं और अटकलें है कि जल्द ही वे संगीता को तलाक दे सकते हैं. ऐसे खराब वक्त में सलमान अपनी पूर्व प्रेमिका के लिए मसीहा बनकर सामने आए हैं. अब सल्लू मियां संगीता बिजलानी के करीब हो गए हैं, तो भला कैट को यह कैसे न नागवार गुजरे.
अब खास बात, संगीता बिजलानी सलमान की इस पार्टी में आई थी. पार्टी में भी आई और सलमान ने मीडिया के सामने यह ऐलान भी किया कि संगीता बिजलानी का उनकी जिंदगी में अहम स्थान है. यही वजह है कि कैट इस पार्टी से नदारद थी.
मतलब यह कि सलमान ने एक बार फिर अपनी प्र्रेमिका बदल ली है. वर्तमान वाली कैट अब सल्लू मियां के लिए अतीत की बात हो गई है और अतीत वाली संगीता बिजलानी में वे भविष्य देख रहे हैं. इसे कहते हैं अजब सल्लू की गजब प्रेम कहानी !

Monday, August 9, 2010

क्लासिक सिनेमा ः अंगूर


गुलजार साहब की बात जब भी होती है, तो उनके द्वारा बनाई फिल्मों के लिए होती है. और उनकी फिल्मों की बात होती है, तो आंधी,, मेरे अपने, मौसम, माचिस जैसी हिंदी सिनेमा की श्रेष्ठ फिल्मों की बात होती है. लेकिन इस बीच गुलजार साहब के चाहने वाले यह भूल जाते हैं कि गंभीर मुद्दों को बेहतरीन अंदाज में फिल्माने वाला यह निर्देशक हास्य फिल्मों में भी महारत हासिल रखता था. हास्य पर अपनी पकड़ साबित करने के लिए ही गुलजार साहब ने 1982 में एक पिक्चर बनाई थी अंगूर. इस कॉमेडी पिक्चर में उनके पसंदीदा संजीव कुमार दोहरी भूमिका में थे, तो साथ में देवेन खोटे भी दोहरी भूमिका में. यह फिल्म शुरू से आखिर तक हंसाती है और सबसे बड़ी बात यह कि आज के डेविड धवन, अनीस बज्मी की तरह यह थोपी गई कॉमेडी नहींं है, बल्कि स्थितिपरक कॉमेडी है. कहने का मतलब कि इस पिक्चर में शुरू से आखिर तक परिस्थितियां ही ऐसी घटती है कि आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाए.
कहानी इस पिक्चर की यह है कि एक पति-पत्नी के जुड़वा बच्चे पैदा होते हीे बिैछड़ जाते हैं. मजा यह कि उन्होंने एक जोड़ी जुड़वा बच्चेे भी गोद ले रखे हैं. वे भी बिछड़ जाते हैं. अब कई बरस बाद एक जुड़वा अपने साथी के साथ उसी शहर में आता है ,जहां दूसरा रह रहा है. यही से शुरू होती है हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देने वाली स्थितियों की श्रंखला.
इस पिक्चर में मौसमी चटर्जी और दीप्ति नवल भी है हंसाने के लिए. यह एकदम शुध कॉमेडी है और इस कदर हंसाती है कि आप लोटपोट हो जाएं.
इसलिए किसी रविवार अगर घर बैठे ऊंचे दर्जे की कॉमेडी फिल्म देखना है तो बस आप इतना कीजिए ः अपने डीवीडी पार्लर जाकर गुलजार साहब का यह हंसी का पिटारा ले आईए. बड़े उम्दा दर्जे की कॉमेडी है ये साहब...
खास बात ः यह फिल्म महान नाटककार सेक्सपीयर के नाटक कॉमेडी आॅफ एरर्स पर बनी है, लेकिन गुलजार साहब ने इसका इस कुशलता के साथ भारतीयकरण किया है कि बस मजा आ जाता है.

प्रियंका और खतरों के खिलाड़ी


आज से दो दशक पहले की ही बात करें, तो छोटे पर्दे पर काम करना तो दूर, बॉलीवुड सितारें तो विज्ञापनों में आने तक से कतराते थे. डर उन्हें यह रहता था कि कहीं दर्शक उन्हें देख-देखकर बोर न हो जाएं, या फिर कहीं टीवी पर आने से उनका फिल्मी कॅरिअर खतरे में नहीं पड़ जाएं.
लेकिन आजकल तो ट्वीटर और फेसबूक का जमाना है. सो, सितारों ने भी अपनी चाल-ढाल बदल ली है. अब उनकी कोशिश यही रहती है कि जैसे-तैसे किसी भी तरह अपने प्रशंसकों के दिलो-दिमाग पर छाए रहे बस. इसी सोच का नतीजा है कि आज टीवी पर अमिताभ बच्चन, शाहरूख, सलमान जैसे सितारे भी दिखाई देते हैं.
यह तो हुई अभिनेताओं की बात, लेकिन आजकल तो अभिनेत्रियां भी छोटे परदे पर आने से परहेज नहीं करती. अब देखिए प्रियंका चैपड़ा को. आज बॉलीवुड की शीर्ष तीन अभिनेत्रियों में गिनती होती है उनकी. पिछले दो साल में कमीने, दोस्ताना और फेशन जैसी कामयाब फिल्में दी है उन्होंने. लेकिन फिर भी टीवी पर काम करने से कोई परहेज नहीं उनकों. जल्द ही नजर आएंगी वे फियर फेक्टर ः खतरों के खिलाड़ी के तीसरे सीजन की मेजबानी करते. इसके पिछले सीजन की मेजबानी अक्षय कुमार ने की थी, लेकिन अब दिलकश प्रियंका इस शो में नजर आएगी. इस बार शो में राहुल बोस, डीनो मारिया, अभिषेक कपूर जैसी हस्तियां अपने खतरनाक स्टंट दिखाती आएगी.
सो, इस बार खतरों के खिलाड़ी में आपके लिए दोहरा तोहफा है ः खतरनाक स्टंट के साथ प्रियंका की दिलकश अदाएं बिल्कुल मुप्त.

तनीषा और उदय का अफसाना


बॉलीवुड में एक बड़ी जबर्दस्त प्रेम कहानी हुआ करती है. असल जिंदगी की इस प्रेम कहानी के नायक-नायिका हैं उदय चैपड़ा और तनीषा मुखर्जी. जी हां, वहीं जोड़ी जो बेहद वाहियात पिक्चर निल एंड निकी में साथ नजर आएंगे. दूसरी पहचान इन दोनों की यह है कि उदय चैपड़ा बॉलीवुड के सबसे बड़े फिल्मी चैपड़ा घराने के छोटे चिराग हैं. मतलब यह कि उदय दिग्गज निर्देशक यश चैपड़ा के छोटे बेटे और आदित्य चैपड़ा के छोटे भाई हैं. वहीं तनीषा काजोल की छोटी बहन है और अजय देवगन की साली साहिबा.
इन सबसे अलग, एक पहचान इन दोनों की यह भी है कि ये दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं. लेकिन इनका प्यार कुछ अलग तरह का है. इनकी दोस्ती शुरू हुई उसी पिक्चर निल एंड निकी से. पिक्चर तो नहीं चली, लेकिन इनका प्यार चल पड़ा. लेकिन चलते-चलते जल्द ही खत्म भी हो गया ये प्यार. वजह, बॉलीवुड में ऐसी बताते हैं कि जब भी इन दोनों का कॅरिअर अच्छा चल निकलता है ,तो ये दोनों एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और जहां कॅरिअर का बंटाढार हुआ कि वापस एक-दूसरे के पास.
तो अब वहीं हो रहा है. उदय चैपड़ा की आखिरी पिक्चर प्यार इंपासिबल टिकट खिड़की पर उसी तरह लुड़की थी, जैसे उनकी पिछली सभी फिल्में. उधर, तनीषा के पास तो बरसों से कोई पिक्चर है ही नहीं. बीच में खबरें आई थी कि बड़ी बहन काजोल उनके कॅरिअर को फिर से ठीक करनें में लगी है, जल्द ही उनके लिए कोई पिक्चर भी बना सकती है. लेकिन जल्द ही यह बात भी आई-गई हो गई.
बात यह कि दोनों आजकल एकदम खाली बैठे हैं. सो, एक बार वे फिर एक-दूसरे के करीब आ गए हैं. आजकल उन दोनों को फिर एक-साथ खूब देखा जा रहा है. खास बात यह है कि इस रिश्ते को लेकर दोनों के ही परिवार वाले तो कब से तैयार बैठे है लेकिन अब लग रहा है कि तनीषा और उदय भी इस रिश्ते को शादी की दहलीज तक पहुंचाने के लिए तैयार हो गए हैं.

इस शुक्रवार ः पीपली लाईव


निर्माता ः आमिर खान
निर्देशक ः अनुषा रिजवी
कलाकार ः रघुवीर यादव, ओंकारदार मानिकपूरी, मलिका शिनाय, शालिनी वाट्सा.
कहानी ः पिपली गांव का नत्था यानी कि ओंकारदास अपनी जमीन इसलिए गंवाने की कगार पर आ गया है, क्योंकि उसने सरकार से लिए गए लोन को वापस नहीं चुकाया. तभी उसे पता चलता है कि वहीं सरकार सूखे और कर्ज के चलते आत्महत्या करने वाले किसानों को पैसा दे रही है. इसका मतलब यह कि नत्था अपनी जान देकर अपने परिवार को कर्ज से उबार सकता है. नत्था का बड़ा भाई रघुवीर यादव उसे आत्महत्या के लिए प्रोत्साहित करता है. लेकिन नत्था मरने से डर रहा है. इसी दौरान इलाकें में चुनाव होने वाले हैं. सो राजनीति की खातिर नत्था की प्रायोजित आत्महत्या को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया जाता है. खबरों का भूखा इलेक्ट्रानिक मीडिया भी इस खबर को भूनाने के लिए पहुंच जाता है.
खास बात ः रघुवीर यादव को छोड़कर इस पिक्चर में कोई भी बड़ा कलाकार नहीं है. नत्था की केंद्रीय भूमिका निभाने वाले ओंकारदास मूलतः छत्तीसगढ़ के रंगमंच कलाकार हैं. इसमें जितने भी कलाकारों ने काम किया है, सभी रंगमंच से जुड़े हुए हैं. पिक्चर की निर्देशिका अनुषा रिजवी पत्रकार रह चुकी है एनडीटीवी के लिए. इस पिक्चर की शूटिंग मध्यप्रदेश के पास स्थित बदवई गांव में की गई है.

सोनम का पुराना प्यार


आई हेट लव स्टोरीज और आयशा जैसी दो लगातार कामयाब फिल्मों के बाद भले ही सोनम कपूर के लाखों-करोड़ो दिवाने हो गए हों, लेकिन यह कपूर कन्या खूद एक गायक पर मरती है. यह बात लोगों को तब पता चली जब सोनम अपनी फिल्म के प्रचार के लिए टीवी के एक कार्यक्रम छोटे उस्ताद में पहुंची थी. वहां गायक शान भी मौजूद थे और तब सोनम ने यह खुलासा किया कि वे बॉलीवुड में आने से पहले शान को बहुत पसंद करती थी.
सोनम के मुताबिक शान सिर्फ उनके पसंदीदा गायक ही नहीं थे, बल्कि उनका व्यक्तित्व भी उन्हें खूब लुभाता था.
वैसे, कपूर कन्या के मूंह से इस तरह की बातें निकलना हैरान कर देने वाली बात है, क्योंकि आमतौर पर सोनम को बॉलीवुड की सीधी-सादी कन्या के तौर पर जाना जाता है. याद कीजिए सोनम की इसी सीधी-सादी छवि से बोर होकर रणबीर कपूर ने उनका साथ छोड़कर सेक्सी और दिलकाश दीपिका पादुकोण से दोस्ती कर ली थी. तब तक सोनम सांवरिया और दिल्ली 6 जैसी नाकाम फिल्में जुड़ी हुई थी.
लेकिन अब सोनम के सितारे पूरी तरह बदल चुके हैं. टिकट खिड़की के आंकडें कह रहे हैं कि सोनम की पिछले शुक्रवार रिलीज हुई फिल्म आयशा भी हिट है. मतलब यह कि अनिल कपूर की लाडली बिटिया इस साल लगातार दो हिट फिल्में दे चुकी है. ऐसे में अगर वे अपने प्रेम-प्रसंगों या अपनी दीवानगी की बातें बता रही है, तो इसमें भला हर्ज क्या है. कॅरिअर के अच्छे दौर में तो ऐसी बातें याद आती ही है.

सुष्मिता की छोटी सी प्रेम कहानी !


पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन और उनकी अभिनेत्री पत्नी संगीता बिजलानी के बीच का रिश्ता तो खत्म हो ही चुका है, लेकिन इन दोनों बॉलीवुड से एक और रिश्ते के टूटने की खबर आ रही है. चर्चाएं है कि पूर्व विश्व सुंदरी सुष्मिता सेन ने पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और तेज गेंदबाज वसीम अकरम के साथ अपने रिश्ते खत्म कर लिए है.
अब आप कहेंगे कि दोनों के बीच रिश्ता था ही कब ? तो जनाब हम बताए देते हैं आपको. दरअसल कुछ साल पहले अकरम भारतीय टेलीविजन के एक डांस शो में जज बनकर आए थे. इसी शो में सुष्मिता सेन ने भी बतौर जज हिस्सा लिया था. बस यही से दोनों के बीच प्यार पनपा. तभी आईपीएल आ गया और अकरम इसमें खेलने वाली कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम के गेंदबाजी कोच बन गए. इसके चलते कई महीनें अकरम ने भारत में ही बिताए, जिससे सुष्मिता के साथ उनके रिश्ते और ज्यादा प्रगाढ़ हो गए. इस बीच हुआ यह कि अकरम की पत्नी हूमा का बीमारी के चलते निधन हो गया, जिससे पाकिस्तान का यह तेज गेंदबाज पूरी तरह अकेला हो गया. बताते हैं ऐसे ही तनहा दौर में सुष्मिता ने अकरम को सहारा दिया. बीच में तो यहां तक खबरे थें कि दोनों एक साथ रहने का मन बना चुके हैं और जल्द ही दुबई को अपना ठिकाना बना लेंगे.
लेकिन अफसोस कि यह होता इससे पहले ही दोनों के रिश्ते के टूटने की बातें सामने आने लगी है. इसके पीछे तर्क जो बताया जा रहा है वह यह है कि सुष्मिता का दिल ज्यादा देर तक किसी एक पर टिका नहीं रहता. याद कीजिए सुष्मिता इससे पहले विक्रम भट्ट, रणदीप हुड्डा, मुसद्दर अजीज जैसे न जाने कितने मर्दों के साथ प्यार की पींगे बढ़ा चुकी हैं. लेकिन जल्द ही हर किसी के साथ उनका ब्रेकअप हो गया.
वजह यह है कि तीस साल से ज्यादा की उम्र के बाद भी सुष्मिता को लगता है कि उनका बॉलीवुड में कॅरिअर अभी भी बचा हुआ है. बस इसी उधेड़बून में बेचारी वफादार प्रेमियों से भी दूर होती जा रही है.

Saturday, August 7, 2010

एक कहानी साजिद-फराह की


मुंबईयां इंडस्ट्री में एक जोड़ी भाई-बहन हुआ करते हैं. नाम है इनके फराह और साजिद खान. दोनों ही आज की तारीख में बॉलीवुड के सबसे कामयाब निर्देशकों में शुमार किए जाते हैं. बतौर निर्देशक जहां फराह खान के खाते में ओम शांति ओम और मैं हूं ना जैसी कामयाब फिल्में दर्ज हैं, वहीं भाई साजिद भी हे बेबी और हाउसफुल जैसी हिट फिल्में दे चुके हैं. इन दोनों भाई-बहनों की कोई भी पिक्चर अभी तक नाकाम नहीं रही है.
जाहिर है, कामयाबी का प्रतिशत सौ फीसदी है, तो वे भी बॉलीवुड के सबसे हॉट निर्देशक होंगे. वे हैं भी. लेकिन बात यहां उनकी कामयाबी के किस्सों की नहीं हो रही है, बल्कि बात बॉलीवुड में उनके संबंधों को लेकर हो रही है. दरअसल इन दोनों ने ही अपने दोस्तों के साथ वफादारी को लेकर किसी जमाने में बड़ी-बड़ी बाते की थी. गौरतलब है कि फराह खान की पहली फिल्म में शाहरूख ने न सिर्फ काम किया था, बल्कि उसे प्रोड्यूस भी किया था. तब दोनों एकदम पक्के दोस्त नजर आते थे. फराह ने कसमें खाई थी कि वे कभी भी शाहरूख के बिना पिक्चर नहीं बनाएंगी. शाहरूख के साथ उन्होंने एक पिक्चर और बनाई ः ओम शांति ओम. लेकिन इसके बाद यह दोस्ताना टूट गया. अब शाहरूख के साथ फिल्में करने की कसमें खाने वाली फराह उनके कट्टर दुश्मन सलमान के कैंप में जा खड़ी है. चर्चाएं है कि वे जल्द ही सलमान को लेकर एक पिक्चर बनाने जा रही है, जिसमें सलमान के साथ कैटरीना कैफ की बहन काम करेगी.
अब बात भाई साजिद की. इन्होंने अपने कॅरिअर की दो फिल्में निर्माता साजिद नाडियाडवाला के लिए बनाई. बहन की तरह ही भाई साजिद ने भी जल्दी ही कसमें खा ली कि वे बगैर नाडियाडवाला के कोई पिक्चर नहीं बनाएंगे. लेकिन अब वे वासु भागनानी के साथ अपनी अगली पिक्चर की तैयारियों में जुटे हैं.
बॉलीवुड में रिश्ते हर शुक्रवार किस तरह बदल जाया करते हैं, इन भाई-बहनों की मिसाल से समझ लीजिए आप !

Friday, August 6, 2010

अमीषा की घर वापसी


सलमान खान जब भी पार्टी देते हैं ,तो बॉलीवुड में कुछ न कुछ तो अप्रत्याशित घटता ही है. याद कीजिए पिछली बार कैटरीना के जन्मदिन पर सलमान द्वारा दी गई पार्टी को, जब शाहरूख के साथ उनकी लड़ाई ने कितनी सुर्खियां बटोरी थी. सलमान की उस पार्टी में शाहरूख के साथ की गई दुश्मनी वे आज भी निभा रहे हैं और बॉलीवुड में इसकी मिसाल आज भी दी जाती है. तब से बेचारी कैटरीना ने तो सलमान की पार्टियों से ही तौबा कर ली है.
सो, झमेलों में पड़ने के लिए सल्लू मियां ने जब हाल ही में अपनी बहन अर्पिता और भाई अरबाज के जन्मदिन के मौके पर पार्टी दी, तो हमेशा की तरह ही इस पार्टी से भी कई नई बातें निकलकर आई. इनमें सबसे गौरतलब बात अमीषा पटेल से जुड़ी हुई थी. जी हां, अमीषा पटेल, वहीं हीरोईन जिसे रितिक रोशन के साथ कहो ना प्यार है जैसी ब्लाकबस्टर फिल्म से बॉलीवुड में इंट्री मिली थी. याद कीजिए चंद साल अरसा पहले का घटनाक्रम, जब अमीषा ने अपने परिवार को छोड़कर निर्देशक विक्रम भट्ट को अपना लिया था. तब अमीषा के परिवार की लड़ाई पूरी दुनिया के सामने आ गई थी. तब से ही अमीषा का अपने माता-पिता और अभिनेता भाई अश्मित से रिश्ता पूरी तरह से टूट गया था.
लेकिन सलमान की पार्टी में अजूबा यह हुआ कि अमीषा अपने भाई अश्मित के साथ इस पार्टी में आई थी. वैसे तो इस पार्टी में और भी कई अजूबे हुए-जैसे कि संगीता बिजलानी भी इस पार्टी में आई थी, जैसे कि कैटरीना कैफ इस पार्टी में नहीं आई थी.
लेकिन फिर भी सबसे ज्यादा सुर्खियां यही खबर बटोर रही है कि अमीषा अपने परिवार के करीब फिर से आ गई है. वैसे भी अमीषा का कॅरिअर इन दिनों ज्यादा अच्छा चल नहीं रहा है. विक्रम भट्ट से भी उनका अलगाव हो चुका हैं. ऐसे में परिवार का सहारा अमीषा के लिए अच्छा वक्त लेकर आएगा.

दीपिका का नया प्यार


बला की ख्ूाबसूरत दीपिका पादुकोण लगातार हिट फिल्मों के साथ तो बॉलीवुड की सबसे कामयाब हिरोईनों में शुमार हो ही चुकी है, लेकिन साथ ही उनके प्रेम प्रसंग भी खूब सुर्खियों में रहते हैं. 2007 में शाहरूख खान के साथ ओम शांति ओम से अपने फिल्मी कॅरिअर का आगाज करने वाली दीपिका का नाम सबसे पहले रणबीर कपूर के साथ जुड़ा था. दोनों ने सिधार्थ आनंद की फिल्म बचना ऐ हसीनों में साथ काम किया, जिसकी शूटिंग के दौरान ही दोनों का प्यार परवान चढ़ा. प्यार भी इतना ज्यादा कि दीपिका ने रणबीर के नाम का टेटू ही गुदवा लिया अपने हाथ पर. तब लगा था कि दोनों अपने संबंध को लेकर गंभीर है. लेकिन जल्द ही रणबीर की कूछ फिल्में कामयाब हो गई. कामयाबी मिलते ही रणबीर के सूर भी बदल गए और वे दीपिका के बजाए अपने कॅरिअर को लेकर गंभीर हो गए. इसके बाद दीपिका का नाम तो कई लोगों जिनमें युवराज सिंह, महेंद्रसिंह धोनी जैसे भारतीय क्रिकेटरों के साथ जुड़ा, लेकिन ये सिर्फ टाइमपास ही साबित हुआ.
लेकिन अब दीपिका का प्रेम प्रसंग एक बार फिर सुर्खियां बटोर रहा है. इस बार दीपिका के प्यार की चर्चाएं देश में शराब के बेताज बादशाह और बड़े उद्योगपति विजय माल्या के बेटे सिधार्थ माल्या के साथ हो रही है. चर्चाएं है कि दीपिका माल्या जूनियर के साथ अपने संबंधों को लेकर बेहद गंभीर है. इन दोनों का प्यार परवान तब चढ़ा, जब दीपिका आईपीएल के मैचों में जूनियर माल्या की बैंगलोर टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए मैदान में आती थी. तब ही दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ा. आईपीएल खत्म होने के बाद भी दोनों को एकसाथ देखा जा रहा है, जिससे उनके संबंधों को लेकर फिर से कयास लगने लगे हैं. हाल ही में सलमान खान की बहनों के जन्मदिन के मौके पर दीपिका पार्टी में शामिल हुई, तो जूनियर माल्या भी उनके साथ थे. इससे एक बार फिर लगने लगा है कि दीपिका-जूनियर माल्या का प्यार मंजिल तक पहुंचकर ही थमेगा.

मलाईका का आइटम तड़का


बॉलीवुड में वैसे तो वर्तमान में राखी सावंत, कोईना मित्रा, शर्लीन चैपड़ा, अब्दुला ब्रूना जैसी कई आईटम बालाएं मौजूद है ,लेकिन जब बात मलाईका अरोरा की होती है, तो उनका नाम सबसे पहले लिया जाता है. अगर पुराने जमाने में हेलन को बॉलीवुड की सबसे उम्दा आईटम बाला कहा जाता था, तो अब उनकी जगह मलाईका ने ले ली है. याद कीजिए मणिरत्नम की फिल्म दिल से... का वह गाना छैया...छैया जिसमें मलाईका किंग खान के साथ चलती टेªन के ऊपर थिरकती नजर आती है. फिल्म से ज्यादा वह गाना चला था, और इसके साथ ही मलाईका भी आईटम गानों की विशेषज्ञ मानी जाने लगी.
बॉलीवुड में एक और बात बड़ी मशहूर है कि मलाईका को फिल्म के एक आईटम गाने में लेना शूभ रहता है. मतलब यह कि अगर मलाइका किसी गाने में मौजूद है ,तो वह फिल्म टिकट खिड़की पर हिट हो जाती है. अब टिकट खिड़की का टोटका ही सबसे जरूरी है बॉलीवुड में. लोग टिकट खिड़की पर कामयाब होने के लिए न जाने क्या क्या कर गुजरते हैं. सो, ऐसे में भला मलाईका को आईटम गाने में लेने मे क्या बुराई.
सो, जब पूरा बॉलीवुड मलाईका को लकी मानता है, तो फिर भला उनका खूद का परिवार कैसे पीछे रहे. नतीजा यह कि मलाईका जल्द ही अपने घरेलू बैनर की फिल्म दबंग में भी आईटम का तड़का लगाती नजर आएगी. मलाइका के लिए तो यह दोहरी खूशी की बात है क्योंकि इस फिल्म के निर्माता उनके पति अरबाज ही है. अरबाज को यह आइडिया बड़े भाई सलमान ने दिया. सो, किंग खान के साथ दिल से और काल जैसी फिल्मों में ठूमके लगा चुकी मलाइका अब अपने जेठ सलमान के साथ जलवे बिखेरती नजर आएगी. दंबग पिक्चर ईद के मौके पर रिलीज हो रही है.
तो आप भी तैयार हो जाइए ईद पर डबल धमाके लिए...सलमान और मलाईका का धमाका.

फिल्म समीक्षा ः हंसती-गाती आयशा


बॉलीवुड में आजकल एक नया टेªंड निकला है ः प्रेम कहानी पर पिक्चर बनाओं, तो ऐसी बनाओं जिसमें कोई रोना-धोना न हो. बस प्यार, मस्ती, मजाक और बढ़िया संगीत हो और पिक्चर हसंते-गाते ही खतम हो जाए. इस हप्ते रिलीज हुई आयशा बिल्कुल ऐसी ही फिल्म है. अनिल कपूर के प्रोडक्शन में बनी इस फिल्म के नायक-नायिका, निर्माता-निर्देशिका और प्रोडक्शन डिजाइनर सभी हमउम्र के ही हैं. यानी कि सभी युवा हैं. और यह बात इस पिक्चर को देखते वक्त पता भी चल जाती है. फिल्म की कहानी एक अंग्रेजी उपन्यास से ली गई है. एमा नामक यह उपन्यास लिखा तो अठारवीं सदी में गया था, लेकिन फिल्म की निर्देशिका और लेखिका ने उसे आज के जमाने से क्या खूब ढाला है. पूरी पिक्चर आज के जमाने की लगती है या कह लें कि आज के जमाने से भी आगे की लगती है. कहानी इस पिक्चर की एकदम सीधी-साधी है. नायिका हर किसी के मामले में टांग अड़ाती है और नायक चाहता है कि नायक सिर्फ अपने काम से काम रखें. नतीजा यह होता है कि दोनों के बीच ढेर सारी नोकझोंक, लड़ाई-झगड़ा. लेकिन फिर नायिका को नायक पर प्यार आने लगता है. आगे क्या होता है आप खूद ही सिनेमाघर में जाकर देखे तो ज्यादा अच्छा.
बात करते हैं निर्देशिका की. इस पिक्चर की निर्देशिका राजश्री ओझा को रोना-धोना पसंद नहीं, यह बात तो तय है. पूरी फिल्म एकदम हल्के-फुल्के दृश्यों के साथ चलती है. हीरो-हिरोईन भी खूब बला के छांटे हैं उन्होंने. सोनम इस फिल्म की असल हीरो है और उन्होंने ऐसा काम भी कर दिखाया है. पापा अनिल से अभिनय के सीखे गुर ऐसे दिखाए हैं इस पिक्चर में कि अनिल को भी गर्व होगा. हीरो के तौर पर अभय देओल भी खूब पसंद आते हैं. नायिका प्रधान फिल्म में भी उन्होंने खूब अच्छा अभिनय किया है.
यह फिल्म एक सुखद अहसास दे जाती है. कोई रोना-धोना नहीं, बस मस्ती, मजाक और गाना-बजाना. इससे याद आया इस पिक्चर के गाने भी बड़े उम्दा है. गाने जब-जब आते हैं तो नाचने का मन हो जाता है बस. यह फिल्म कूरकूरे नमकीन की तरह है. स्वाद लेकर देखते ही जाओं...बढ़िया....और खासी मनोरंजक कूल मिलाकर.

अब सोनाक्षी सिन्हा की बारी


बॉलीवुड में एक और सितारा पुत्री धमाकेदार आगाज की पूरी तैयारी कर चुकी है. यह हीरोईन है बीते जमाने के दिग्गज अभिनेता शत्रुध्न सिन्हा की लाडली बिटिया सोनाक्षी सिन्हा. तेईस वर्षीया सोनाक्षी इस साल ईद पर रिलीज होने जा रही फिल्म दबंग में नजर आएगी.
बड़ी बात है कि इस फिल्म में उनके नायक की भूमिका माचो मेन सलमान खान निभा रहे हैं. इस पिक्चर को सलमान के भाई अरबाज ने निर्देशित किया है और अनुराग कश्यप के भाई अनुभव कश्यप इस फिल्म के निर्देशक है.
जाहिर है, सोनाक्षी का आगाज धमाकेदार होने की पूरी संभावना है. बॉलीवुड में बहुत कम ही हीरोईनों को अपनी पहली ही फिल्म में सलमान खान जैसे सितारे के साथ काम करने का मौका मिलता है. ऐसे में यह सोनाक्षी के लिए दोहरी खुशी की बात है, जो अपनी हमउम्र लड़कियों की तरह ही सलमान की फिल्में देखकर बड़ी हुई है.
वैसे, ग्लैमर जगत के लिए सोनाक्षी कोई नहीं है. उन्होंने अपने कॅरिअर का आगाज एक मॉडल के तौर पर किया था. बतौर मॉडल सोनाक्षी लक्मे फेशन वीक में रैम्प पर चल चुकी है.
दूसरी ओर, सिन्हा परिवार के लिए भी यह जश्न का मौका है. इससे पहले शत्रुध्न के बेटे लव सिन्हा भी बतौर अभिनेतो पर्दे पर नजर आ चुके हैं. लेकिन सोनाक्षी को अपने भाई की तुलना में ज्यादा प्रतिभावान माना जा रहा है.

करीना की ख्वाहिश पूूरी


बॉलीवुड की दो बेहतरीन अभिनेत्रियों काजोल और करीना कपूर के बीच संबंध भी बड़ा दिलचस्प है. कपूर खानदान की लाडली करीना ने जब बॉलीवुड में प्रदार्पण किया, तब काजोल शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार की जाती थी. ऐसे में जाहिर है कि करीना काजोल को हमेशा से अपना प्रेरणास्त्रोत मानती रही है. करीना कई दफा खूले तौर पर कह चुकी है कि काजोल वर्तमान में बॉलीवुड की सबसे काबिल अभिनेत्री हैं, जो किसी भी तरह के रोल में फिट हो जाती है. करीना हमेशा ही काजोल के साथ काम करने को लेकर उत्सुक रहती है.
हालांकि पहले ये दोनों करण जौहर की फिल्म कभी खुशी कभी गम में साथ काम कर चुकी है. लेकिन इस फिल्म में दोनों के बीच दृश्य बिल्कुल भी नहीं थे. ऐेसे में करीना की काजोल के साथ पर्दे पर साथ नजर आने की ख्वाहिश अधूरी ही रह गई थी.
लेकिन अब करीना की यह ख्वाहिश पूरी होने वाली है. करण जौहर के ही बैनर की एक और फिल्म वी आर फेमेली में दोनों एक साथ नजर आएंगी. इस फिल्म को सिधार्थ मल्होत्रा बना रहे हैं और यह हॉलीवुड की 1998 में रिलीज हुई फिल्म स्टेपमाम की रिमेक है. इस पिक्चर में काजोल और करीना सौतन की भूमिकाओं में नजर आएगी. पिक्चर के हीरों तो अर्जुन रामपाल है, लेकिन कहानी करीना और काजोल के इर्द-गिर्द ही घूमती है.
यह फिल्म 3 सितंबर को रिलीज होगी, लेकिन करीना काजोल के साथ काम करने को लेकर अभी से ही उत्साहित नजर आ रही है. आखिर काजोल के साथ स्क्रीन शेयर करने की उनकी पुरानी ख्वाहिश पूरी होने जा रही है. करीना और काजोल के प्रशंसकों को भी इस पिक्चर का बेसब्री से इंतजार है.